हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। बाला वाला स्थित मां दक्षिण काली कस्तूरी सदन में आज श्रद्धा,साधना और सामाजिक उत्तरदायित्व से ओतप्रोत वातावरण में वर्ष 2025 की भावपूर्ण विदाई एवं नववर्ष 2026 के मंगलमय स्वागत का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। यह समारोह केवल एक कैलेंडर वर्ष के परिवर्तन का अवसर नहीं था,बल्कि आत्मिक जागरण, सांस्कृतिक पुनर्स्मरण और सामाजिक संकल्प का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। कार्यक्रम में मां दक्षिण काली मन्दिर समिति के समस्त पदाधिकारी,साधकगण एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। विधिवत पूजन-अर्चन के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ,जिसके उपरान्त मां दक्षिण काली की दिव्य कथाओं का वाचन,सहस्त्र नाम पाठ,तथा पंच महामुखी हनुमान के विशिष्ट नामों से याज्ञिक अनुष्ठान सम्पन्न किए गए। वैदिक मंत्रोच्चार,शंखनाद एवं दीप प्रज्वलन से सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा। इस पावन अवसर पर मां दक्षिण काली कस्तूरी सदन के संस्थापक,मां दक्षिण काली के सेवक एवं ध्वजवाहक,ज्योतिषाचार्य डॉ.अखिलेश चंद्र चमोला ने श्रद्धालु-भक्तजनों को संबोधित करते हुए कहा कि मां काली शक्ति,विवेक और आत्मसंयम की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनकी उपासना हमें केवल भक्ति नहीं,बल्कि नशामुक्त,संस्कारित और सेवा-प्रधान जीवन जीने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि आज समाज को सबसे अधिक आवश्यकता आध्यात्मिक चेतना से युक्त सामाजिक सुधार की है। नशा न केवल व्यक्ति का,बल्कि परिवार और समाज का भी पतन करता है। इसलिए प्रत्येक श्रद्धालु का यह कर्तव्य है कि वह मां काली की कृपा से अपने घर,मोहल्ले और समाज को नशामुक्त,स्वस्थ और नैतिक मूल्यों से संपन्न बनाने का संकल्प ले। डॉ.चमोला ने भावी पीढ़ी की ओर संकेत करते हुए कहा कि संस्कारहीन विकास समाज को दिशाहीन बना देता है,जबकि अध्यात्म से जुड़ा विकास मानवता को सशक्त करता है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से-आर्थिक आह्वान किया कि वे अपने आचरण से आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श स्थापित करें और मां काली के मार्गदर्शन में सदाचार,संयम और सामाजिक समरसता को जीवन का आधार बनाएं। समारोह के दौरान उपस्थित श्रद्धालु और भक्तजनों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे मां दक्षिण काली की कृपा से नशामुक्त समाज,संस्कृतिमूलक जीवनशैली और सकारात्मक सामाजिक वातावरण के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। साथ ही यह प्रार्थना भी की गई कि नववर्ष 2026 सभी के जीवन में सुख,शांति,समृद्धि और सद्बुद्धि लेकर आए। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालु-भक्तजनों ने मां दक्षिण काली के चरणों में शीश नवाकर एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। यह आयोजन श्रद्धा,संस्कृति,समाज और साधना के अद्भुत समन्वय का जीवंत उदाहरण बन गया,जिसने सभी के मन में आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक चेतना का संचार किया।