मां धारी देवी मंदिर में स्वामी रसिक महाराज ने किया विशेष पूजन-परंपराओं से छेड़छाड़ पर जताई कड़ी आपत्ति

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की अधिष्ठात्री देवी मां धारी देवी के पावन धाम में सोमवार को उस समय भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला,जब सनातन धर्म विकास

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की अधिष्ठात्री देवी मां धारी देवी के पावन धाम में सोमवार को उस समय भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला,जब सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज अपने अनुयायियों के साथ मंदिर पहुंचे। उनके आगमन से मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूब गया और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर पहुंचने पर स्वामी रसिक महाराज का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया। मंदिर के पुजारी लक्ष्मी प्रसाद पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका अभिनंदन किया। इसके पश्चात स्वामी ने मां धारी देवी के समक्ष विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि,शांति और उन्नति की कामना की। पूरे मंदिर परिसर में गूंजते मंत्र,घंटियों की ध्वनि और जयकारों के बीच वातावरण अत्यंत आध्यात्मिक और ऊर्जावान बना रहा। श्रद्धालुओं ने स्वामी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया,वहीं उनके साथ आए अनुयायियों में भी गहरा उत्साह देखने को मिला। इस अवसर पर स्वामी रसिक महाराज ने मां धारी देवी के स्वरूप और महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें स्थिर लग्न की देवी बताया। उन्होंने कहा कि मां धारी देवी केवल एक आस्था का केंद्र नहीं,बल्कि पूरे राष्ट्र में शांति,संतुलन और संरक्षण का प्रतीक हैं। स्वामी ने गंभीरता के साथ यह भी कहा कि आजकल कुछ शरारती तत्व बिना मंदिर समिति की अनुमति के देश के विभिन्न हिस्सों में मां धारी देवी की डोली यात्रा निकाल रहे हैं,जो परंपराओं के विरुद्ध है। उन्होंने इसे धार्मिक मर्यादाओं के साथ खिलवाड़ बताते हुए ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में धर्म,सत्य और सदाचार को अपनाना चाहिए। मां धारी देवी की कृपा से जीवन में स्थिरता,संतुलन और सकारात्मकता बनी रहती है,जिससे हर कठिनाई का समाधान संभव हो जाता है। स्वामी के आगमन की सूचना मिलते ही आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच गए। जयकारों और भक्ति गीतों के बीच पूरा क्षेत्र श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया। कार्यक्रम के दौरान मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित बनाए रखने में सराहनीय भूमिका निभाई। भारी भीड़ के बावजूद अनुशासन और श्रद्धा का संतुलन पूरे आयोजन की विशेषता रहा। गौरतलब है कि अलकनंदा नदी के मध्य स्थित मां धारी देवी मंदिर उत्तराखंड के प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक है,जहां देवी को राज्य की रक्षक शक्ति के रूप में पूजा जाता है। हर वर्ष यहां हजारों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के साथ पहुंचते हैं और मां के दरबार से आशीर्वाद लेकर लौटते हैं। स्वामी रसिक महाराज का यह आगमन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा,बल्कि इसने एक बार फिर यह संदेश भी दिया कि आस्था के साथ परंपराओं का सम्मान और संरक्षण उतना ही आवश्यक है। मां धारी देवी के दरबार से निकला यह संदेश श्रद्धालुओं के मन में लंबे समय तक गूंजता रहेगा।

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