मानवता की मिसाल-एनएच-58 पर बेसहारा छोड़ा गया बछड़ा सुरक्षित गौशाला पहुंचा,अरण्यक जन सेवा संस्था की तत्परता से बची मासूम जान

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर बछेलीखाल के समीप एक छोटे से गौवंश को अज्ञात व्यक्ति द्वारा सड़क पर बेसहारा छोड़ देने की घटना ने संवेदनशील नागरिकों को झकझोर दिया।

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर बछेलीखाल के समीप एक छोटे से गौवंश को अज्ञात व्यक्ति द्वारा सड़क पर बेसहारा छोड़ देने की घटना ने संवेदनशील नागरिकों को झकझोर दिया। व्यस्त हाईवे पर यूं असहाय अवस्था में घूमता यह नन्हा बछड़ा न केवल स्वयं के लिए,बल्कि राहगीरों के लिए भी खतरा बना हुआ था। ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों,पुलिस विभाग और सामाजिक संस्था की त्वरित पहल ने मानवता की एक प्रेरक मिसाल पेश की। सूचना मिलते ही ग्राम प्रधान नरेंद्र और सामाजिक कार्यकर्ता अरविन्द रावत सक्रिय हुए। उन्होंने तत्काल पुलिस चौकी प्रभारी दीपक लिंगवाल से संपर्क किया। पुलिस की मदद से उस बेसहारा गौवंश को सुरक्षित संरक्षण दिलाने की व्यवस्था की गई। तत्पश्चात अरण्यक जन सेवा संस्था द्वारा संचालित अरण्यक गौशाला,ग्राम बागी (देवप्रयाग) में उसे भिजवाया गया। गौशाला पहुंचते ही भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। बताया गया कि वह बछड़ा बिना मां का था,किंतु गौशाला में अन्य गौमाताओं ने उसे स्नेहपूर्वक अपनाया और उसे दूध पिलाया गया। मानो ममता की छांव ने उसे नया जीवन दे दिया हो। अरण्यक जन सेवा संस्था के प्रतिनिधि इन्द्र दत्त रतूड़ी ने कहा कि गौवंश की सेवा केवल धार्मिक भावना नहीं,बल्कि मानवीय दायित्व भी है। उन्होंने इस कार्य में सहयोग देने वाले ग्राम प्रधान नरेंद्र,अरविन्द रावत जी तथा पुलिस चौकी प्रभारी दीपक लिंगवाल का आभार व्यक्त किया। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस विभाग और गौसेवकों की तत्परता की सराहना की। उनका कहना है कि यदि समय रहते यह कदम न उठाया जाता, तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था। यह घटना जहां एक ओर पशुओं के प्रति लापरवाही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है,वहीं दूसरी ओर समाज के उन संवेदनशील लोगों को भी सामने लाती है,जो निस्वार्थ भाव से सेवा में जुटे हैं। बछेलीखाल की यह पहल संदेश देती है कि जब समाज,प्रशासन और सामाजिक संस्थाएं मिलकर कार्य करें,तो हर असहाय जीवन को सहारा मिल सकता है। गौ सेवा ही लोक सेवा है और यही हमारी संस्कृति की पहचान भी।

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