
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। विश्व पृथ्वी दिवस 2026 के अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर में पर्यावरण संरक्षण का संदेश पूरे उत्साह और गंभीरता के साथ गूंज उठा। हमारी शक्ति,हमारा ग्रह विषय पर आयोजित इस विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम ने न केवल विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति उनके दायित्व का बोध कराया,बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में भविष्य के प्रति सजग रहने का संकल्प भी दिलाया। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही। कार्यक्रम के दौरान वातावरण में एक सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिली,जहां युवा पीढ़ी ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण,ऊर्जा बचत और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए दृढ़ निश्चय व्यक्त किया। कार्यक्रम के संयोजक एवं भौतिकी विभाग के वैज्ञानिक तथा हिमालयन एटमॉस्फेरिक एंड स्पेस फिजिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला के मुख्य अन्वेषक डॉ.आलोक सागर गौतम ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं,बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व की अनिवार्य शर्त है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलावों के माध्यम से बड़े परिणाम ला सकते हैं। शारीरिक शिक्षा विभाग के अध्यक्ष डॉ.मुकुल पंत ने पृथ्वी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सतत विकास की अवधारणा को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि यदि आज हम प्रकृति के प्रति सजग नहीं हुए,तो भविष्य की चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं। वहीं डॉ.हीरा लाल यादव ने विभाग द्वारा किए जा रहे पर्यावरणीय प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि शोधार्थियों द्वारा लगाए गए पौधे आज हरियाली का प्रतीक बन चुके हैं,जो निरंतर संरक्षण और समर्पण का परिणाम है। कार्यक्रम में डॉ.गुरदीप,डॉ.रोहित ममगाई,डॉ.अजहर हुसैन अंसारी सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापकगण उपस्थित रहे। राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों और राष्ट्रीय कैडेट कोर के कैडेट्स ने भी पूरे उत्साह के साथ भागीदारी निभाई। साथ ही अनुसंधान प्रयोगशाला के शोधार्थी अमनदीप,अंकित,सरस्वती और अजय की सक्रिय उपस्थिति ने कार्यक्रम को और सशक्त बनाया। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को शपथ दिलाई गई,जिसमें उन्होंने ऊर्जा के समुचित उपयोग,जल संरक्षण,प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित दोहन और स्वच्छ,हरित एवं नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने का संकल्प लिया। साथ ही अपने जीवन में पर्यावरण अनुकूल आदतों को अपनाने और समाज में जागरूकता फैलाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं,बल्कि एक सशक्त संदेश बनकर उभरा-कि यदि युवा जागरूक हैं,तो भविष्य सुरक्षित है। विश्वविद्यालय परिसर में गूंजा यह संकल्प आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस बदलाव का आधार बन सकता है।