हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। देश की सांस्कृतिक विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने और युवाओं के बीच राष्ट्रीय एकात्मता की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान के अंतर्गत युवा संगम चरण-7 के तहत पश्चिम बंगाल से आए युवा प्रतिनिधिमंडल का भव्य एवं पारंपरिक स्वागत किया गया। चौरास परिसर स्थित एकेडमिक एक्टिविटी सेंटर में आयोजित स्वागत एवं संवाद कार्यक्रम में उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक विरासत,शैक्षणिक परंपराओं,सामाजिक जीवन तथा आपसी सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी भाषाई,सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता में निहित है। जब अलग-अलग राज्यों के युवा एक-दूसरे की परंपराओं,जीवनशैली,ज्ञान-विज्ञान और ऐतिहासिक विरासत को करीब से समझते हैं,तो उनके बीच आपसी विश्वास,सम्मान और राष्ट्रीय एकता की भावना और अधिक मजबूत होती है। युवा संगम इसी उद्देश्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। इसके पश्चात पश्चिम बंगाल से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल का तिलक लगाकर और पुष्पमालाएं पहनाकर पारंपरिक भारतीय रीति-रिवाजों के साथ आत्मीय स्वागत किया गया। देवभूमि उत्तराखंड की अतिथि सत्कार परंपरा के अनुरूप प्रतिनिधियों को सम्मानित करते हुए उन्हें स्मृति चिह्न तथा टी-शर्ट,डायरी और आवश्यक सामग्री से युक्त किट भेंट की गई। कार्यक्रम में श्रीनगर नगर निगम की महापौर आरती भंडारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं,जबकि विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो.नारायण सिंह पंवार ने अध्यक्षता की। युवा संगम के राज्य नोडल अधिकारी प्रो.महावीर सिंह नेगी,डीन रिक्रूटमेंट एंड प्रमोशन प्रो.मोहन सिंह पंवार तथा कुलसचिव प्रो.वाई.पी.रैवानी सहित विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य,आयोजन समिति के पदाधिकारी और पश्चिम बंगाल से आए प्रतिनिधि मौजूद रहे। मुख्य अतिथि महापौर आरती भंडारी ने कहा कि युवा संगम देश की विविध संस्कृतियों,परंपराओं और जीवन मूल्यों को एक सूत्र में जोड़ने का सशक्त माध्यम है। पश्चिम बंगाल से आए युवा प्रतिनिधियों को उत्तराखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति,धार्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत,प्राकृतिक सौंदर्य और यहां की विशिष्ट सामाजिक परंपराओं को नजदीक से जानने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में आपसी संवाद तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान का विशेष महत्व है। अलग-अलग राज्यों के युवाओं के बीच संवाद से न केवल एक-दूसरे के प्रति समझ विकसित होती है,बल्कि राष्ट्रीय एकता,भाईचारे और पारस्परिक सम्मान की भावना भी मजबूत होती है। महापौर ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना तभी सार्थक होगी,जब देश की युवा पीढ़ी एक-दूसरे की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को समझते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा संगम में प्रतिभाग करने वाले प्रतिनिधि उत्तराखंड के अनुभवों और यहां की सांस्कृतिक विशेषताओं को अपने साथ लेकर जाएंगे,जिससे दोनों राज्यों के बीच आत्मीयता और सहयोग के नए अवसर विकसित होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो.नारायण सिंह पंवार ने कहा कि शिक्षा और संस्कृति का समन्वय युवाओं में राष्ट्रीय चेतना,सामाजिक समझ और व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक ज्ञान प्राप्त करने का केंद्र नहीं,बल्कि विभिन्न विचारों,संस्कृतियों और अनुभवों के आदान-प्रदान का भी महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि युवा संगम के माध्यम से विभिन्न राज्यों के विद्यार्थी एक-दूसरे की ज्ञान परंपराओं,सामाजिक परिवेश,जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर प्राप्त करते हैं। ऐसे अनुभव युवाओं के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ उनमें सहयोग,सहिष्णुता और राष्ट्रीय जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करते हैं। प्रो.पंवार ने पश्चिम बंगाल से आए प्रतिनिधिमंडल का विश्वविद्यालय परिसर में स्वागत करते हुए कहा कि इस तरह की पहल उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रतिनिधिमंडल का उत्तराखंड प्रवास ज्ञानवर्धक,प्रेरणादायक और यादगार रहेगा। युवा संगम के राज्य नोडल अधिकारी प्रो.महावीर सिंह नेगी ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि युवा संगम के अंतर्गत इससे पूर्व उत्तराखंड के प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम बंगाल का भ्रमण कर वहां की ऐतिहासिक,सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत को करीब से जाना था। अब इसी क्रम में पश्चिम बंगाल से आए प्रतिनिधियों को उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान,सांस्कृतिक परंपराओं और विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियों से परिचित कराने की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल के प्रवास के दौरान विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों,सांस्कृतिक स्थलों,तकनीकी केंद्रों और पर्यटन स्थलों के भ्रमण पर जोर दिया जाएगा,ताकि प्रतिभागियों को उत्तराखंड के सामाजिक,शैक्षणिक और सांस्कृतिक परिवेश को समझने का अवसर मिल सके। प्रो.नेगी ने कहा कि युवा संगम को केवल एक राज्य से दूसरे राज्य की यात्रा तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए। यह विचारों,अनुभवों,ज्ञान और परंपराओं के आदान-प्रदान का प्रभावी मंच है। इसके माध्यम से युवाओं को देश की विविधता को समझने,नए संबंध स्थापित करने और राष्ट्रीय एकता के महत्व को अनुभव करने का अवसर मिलता है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.वाई.पी.रैवानी ने कहा कि युवा संगम देश की विविधता में एकता की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रतिनिधिमंडल के प्रवास को सुविधाजनक,सुरक्षित और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों और युवा प्रतिनिधियों को पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा से आगे बढ़कर समाज,संस्कृति और राष्ट्रीय जीवन के विविध पहलुओं को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच विकसित होने वाले संबंध भविष्य में शैक्षणिक सहयोग और सांस्कृतिक संवाद के नए रास्ते खोल सकते हैं। डीन रिक्रूटमेंट एंड प्रमोशन प्रो.मोहन सिंह पंवार ने कहा कि उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल दोनों ही अपनी समृद्ध सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत के लिए विशिष्ट पहचान रखते हैं। दोनों राज्यों की प्राकृतिक,सामाजिक और शैक्षणिक विशेषताओं को समझना युवाओं के लिए उपयोगी अनुभव साबित होगा। ऐसे आयोजन राष्ट्रीय एकता,समावेशी विकास और पारस्परिक सहयोग की भावना को नई दिशा देते हैं। गढ़वाल विश्वविद्यालय के संग्रहालय में देखी क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत स्वागत एवं संवाद कार्यक्रम के बाद पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधिमंडल ने गढ़वाल विश्वविद्यालय स्थित संग्रहालय का भ्रमण किया। यहां प्रतिनिधियों ने गढ़वाल क्षेत्र की प्राचीन कला,भूगर्भीय अवशेषों,ऐतिहासिक धरोहरों और लोक-संस्कृति से संबंधित प्रदर्शित सामग्री का अवलोकन किया। संग्रहालय भ्रमण के दौरान प्रतिनिधियों को क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि,सांस्कृतिक विशेषताओं और विरासत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त करने का अवसर मिला। इस भ्रमण ने उन्हें उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और गढ़वाल अंचल की ऐतिहासिक समृद्धि को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम प्रदान किया। युवा संगम के तहत इस प्रकार के शैक्षणिक और सांस्कृतिक अनुभवों का उद्देश्य युवाओं को पुस्तकीय जानकारी से आगे बढ़कर भारत की विविध परंपराओं से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना है,ताकि वे देश की साझा विरासत के महत्व को बेहतर ढंग से समझ सकें। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल से आए संकाय सदस्यों में डॉ.लक्ष्मण सिंह बिष्ट,डॉ.सुवर्णा त्रिवेदी,डॉ.अंबुपति मणि कल्याणी,डॉ.एकता भारती और डॉ.सुधीर कुमार शामिल रहे। उत्तराखंड युवा संगम आयोजन टीम की ओर से सहायक नोडल अधिकारी डॉ.कौशल कुमार,समन्वयक डॉ.नरेश कुमार तथा डॉ.रुक्मणी,डॉ.अनु राही,डॉ.नरेंद्र कुमार,डॉ.हिमशिखा गोसाई,डॉ.विजयकांत पुरोहित,डॉ.आशुतोष और डॉ.सर्वेश उनियाल उपस्थित रहे। पश्चिम बंगाल के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए छात्र-छात्राओं और अन्य प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। प्रतिनिधिमंडल के सुगम आवागमन और सुरक्षा के लिए पुलिस की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। युवा संगम का संदेश स्पष्ट है-राज्य अलग हो सकते हैं,भाषाएं और परंपराएं अलग हो सकती हैं,लेकिन भारत की आत्मा एक है। उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के युवाओं के बीच यह संवाद इसी साझा भारतीय पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।