रंगमंच पर गूंजा हयवदन का जादू-गढ़वाल विश्वविद्यालय में कला,संवेदना और अभिनय का अद्भुत संगम

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र,संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित पांच दिवसीय नाट्य समारोह के दूसरे दिन शनिवार की शाम श्रीनगर के गढ़वाल विश्वविद्यालय के केंद्रीय प्रेक्षागृह

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र,संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित पांच दिवसीय नाट्य समारोह के दूसरे दिन शनिवार की शाम श्रीनगर के गढ़वाल विश्वविद्यालय के केंद्रीय प्रेक्षागृह रंग-रूप और रस से सराबोर नजर आया। प्रसिद्ध साहित्यकार गिरीश कर्नाड द्वारा रचित कालजयी नाटक हयवदन का मंचन जैसे ही प्रारंभ हुआ,दर्शक एक अलग ही सांस्कृतिक लोक में प्रवेश कर गए। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आर.पी.शुक्ला उपाध्यक्ष सेवा भारती प्रयागराज,उपनिदेशक कार्यक्रम डॉ.मुकेश उपाध्याय एवं कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर भारतीय संस्कृति की गरिमा और रंगमंच की परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। नाटक का मंचन हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के एम.ए.रंगमंच एवं डिप्लोमा के विद्यार्थियों द्वारा किया गया। युवा कलाकारों ने अपनी सशक्त अभिनय क्षमता,संवाद अदायगी और भाव-भंगिमाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर दृश्य में उनकी साधना और रंगमंचीय अनुशासन स्पष्ट रूप से झलकता रहा। इस प्रभावशाली प्रस्तुति का निर्देशन विभाग के सहायक निदेशक महेन्द्र सिंह द्वारा किया गया,जिनके कुशल मार्गदर्शन में नाटक ने नई ऊंचाइयों को छुआ। मंच सज्जा,प्रकाश व्यवस्था और संगीत का समन्वय भी इतना सटीक रहा कि पूरी प्रस्तुति जीवंत अनुभव में बदल गई। हयवदन जैसे दार्शनिक और प्रतीकात्मक नाटक को जिस संवेदनशीलता और गहराई से मंचित किया गया,उसने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। नाटक के मूल भाव-मनुष्य की अपूर्णता,पहचान और अस्तित्व की खोज को कलाकारों ने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया,जिसकी दर्शकों ने भरपूर सराहना की। कार्यक्रम के दौरान केंद्र के निदेशक गणेश खुगशाल गणी,डॉ.संजय पांडे सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे। इस नाट्य संध्या ने न केवल श्रीनगर गढ़वाल के सांस्कृतिक परिदृश्य को समृद्ध किया,बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि रंगमंच आज भी समाज के अंतर्मन को झकझोरने और नई सोच देने की अद्भुत क्षमता रखता है।

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