रक्तदान की संस्कृति गढ़ने वाले चिकित्सक को नम आंखों से विदाई-निस्वार्थ सेवा,अनुशासन और संवेदना के प्रतिक रहे डॉ.सतीश कुमार सेवानिवृत्त

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से संबद्ध बेस अस्पताल स्थित ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ.सतीश कुमार के सेवानिवृत्त होने पर मेडिकल कॉलेज परिवार द्वारा एक भावभीना एवं गरिमामय

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से संबद्ध बेस अस्पताल स्थित ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ.सतीश कुमार के सेवानिवृत्त होने पर मेडिकल कॉलेज परिवार द्वारा एक भावभीना एवं गरिमामय विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर अस्पताल परिसर भावनाओं से ओतप्रोत रहा और हर वक्ता के शब्दों में डॉ.सतीश कुमार की निस्वार्थ सेवा,मानवीय दृष्टिकोण और अनुकरणीय कार्यशैली की झलक साफ दिखाई दी। तीन दशक से अधिक के अपने सेवाकाल में डॉ.सतीश कुमार ने न केवल एक कुशल चिकित्सक के रूप में पहचान बनाई,बल्कि रक्तदान को जनआंदोलन का स्वरूप देने में भी अहम भूमिका निभाई। उनकी सेवाएं आज हजारों जरूरतमंद मरीजों के जीवन की संजीवनी बन चुकी हैं। शैक्षणिक उत्कृष्टता से सेवा के शिखर तक का सफर-डॉ.सतीश कुमार ने वर्ष 1992 में जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज भागलपुर से एमबीबीएस तथा 1997 में पटना मेडिकल कॉलेज से पैथोलॉजी में एमडी की उपाधि प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने किशनगंज मेडिकल कॉलेज में सहायक आचार्य के रूप में अपनी सेवाओं की शुरुआत की वर्ष 1998 में दूरस्थ जिला चिकित्सालय पिथौरागढ़ में स्थानांतरण के बाद उन्होंने वर्ष 2005 तक विषम भौगोलिक परिस्थितियों में भी पूरी निष्ठा से कार्य किया। पिथौरागढ़ में रहते हुए डॉ.सतीश कुमार ने जिला चिकित्सालय में ब्लड बैंक की स्थापना कर एक ऐतिहासिक कार्य किया। इसके बाद हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय बेस चिकित्सालय,श्रीनगर में भी उन्होंने आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित रक्तकोष की स्थापना कर उसे प्रदेश के उत्कृष्ट ब्लड बैंकों की श्रेणी में खड़ा किया। आज इस ब्लड बैंक से गढ़वाल मंडल के चार जिलों के मरीज लाभान्वित हो रहे हैं तथा प्रतिवर्ष तीन हजार से अधिक यूनिट रक्त जरूरतमंदों को उपलब्ध कराया जाता है। यह उपलब्धि उनके दूरदर्शी नेतृत्व और सतत प्रयासों का प्रत्यक्ष प्रमाण है। स्वयं 21 बार रक्तदान कर बने समाज के लिए प्रेरणा समाज में रक्तदान को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने में भी डॉ.सतीश कुमार का योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने केवल उपदेश नहीं दिए,बल्कि स्वयं 21 बार रक्तदान कर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने। उनके प्रयासों से श्रीनगर क्षेत्र में रक्तदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई। प्रशासनिक दायित्वों का भी किया सफल निर्वहन डॉ.सतीश कुमार ने वर्ष 2012 से 2014 तक बेस चिकित्सालय श्रीनगर में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के रूप में भी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने अनुशासन,पारदर्शिता और मानवीय संवेदना के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें विभिन्न सामाजिक एवं चिकित्सकीय संस्थाओं द्वारा समय-समय पर सम्मानित किया गया। विदाई समारोह में अपने उद्बोधन में डॉ.सतीश कुमार ने भावुक होते हुए कहा मैंने हमेशा प्रयास किया कि अस्पताल में एक अधिकारी नहीं,बल्कि अभिभावक और बड़े भाई की भूमिका निभाऊं। सेवा तभी सार्थक होती है जब वह पूरे मनोयोग और संवेदना के साथ की जाए। उन्होंने इस स्नेहपूर्ण आयोजन के लिए सभी सहयोगियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रभारी प्राचार्य डॉ.विनिता रावत,वित्त नियंत्रक प्रशांत कुमार शर्मा एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ.राकेश रावत ने उनके योगदान को अतुलनीय बताया। संयुक्त अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.विमल गुंसाई द्वारा गाया गया गढ़वाली गीत समारोह का भावनात्मक शिखर बना,जिसने उपस्थित सभी की आंखें नम कर दीं। गरिमामय उपस्थिति कार्यक्रम का कुशल संचालन सचिन फोदणी ने किया। इस अवसर पर ब्लड बैंक की एचओडी डॉ.दीपा हटवाल,डॉ.दीपक डिमरी,डॉ.सी.एम.शर्मा,डॉ.अशोक शर्मा,डॉ.सुरेंद्र सिंह नेगी,डॉ.मोहित कुमार,डॉ.विक्की बख्शी,डॉ.शिबा राणा,डॉ.वंदना,डॉ.ए.एन.पांडेय,डॉ.पार्थ दत्ता सहित ब्लड बैंक के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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