
हिमालय टाइम्स
गबर सिंह भंडारी
श्रीनगर गढ़वाल। पर्वतीय क्षेत्रों में सहकारिता अब केवल एक अवधारणा नहीं रही,बल्कि आत्मनिर्भरता और समृद्धि का प्रतीक बन चुकी है। राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के तहत जनपद पौड़ी गढ़वाल की ढिकवाली समिति और बनेखखाल समिति में संचालित माधो सिंह भंडारी संयुक्त सहकारी खेती योजना के अंतर्गत 50-50 नाली भूमि में लगाए गए ग्लेडियस और गुलदावरी फूलों की प्रथम कटिंग का शुभारंभ उत्सव जैसा रहा। खेतों में रंग-बिरंगे फूलों की कतारें देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो धरती ने स्वयं मुस्कुराकर किसानों की मेहनत को सलाम किया हो। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और किसानों ने संयुक्त रूप से कटिंग की और अपनी फसल की सफलता पर हर्ष व्यक्त किया। महिला किसानों का कहना है,पहाड़ की मिट्टी में मेहनत और सहकार का संगम हो तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। फूलों की खेती ने हमारे जीवन में नई खुशबू भर दी है। परियोजना अधिकारियों के अनुसार,यह पहल सहकारी मॉडल के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का जीवंत उदाहरण बन चुकी है। पारंपरिक खेती से हटकर व्यावसायिक फूल उत्पादन के इस प्रयास ने ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव लाया है। इस परियोजना ने महिला मंगल दलों और गांव के युवाओं में नई चेतना का संचार किया है। जो युवा अब तक रोजगार के लिए शहरों की ओर रुख कर रहे थे,वे अब अपनी ही भूमि पर फूलों की खेती को सुनहरे भविष्य का जरिया मान रहे हैं। महिला मंगल दलों की सदस्याएं फूलों की सजावट,पैकिंग और विपणन से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। युवा किसानों ने कहा कि फूलों की खेती ने उन्हें यह विश्वास दिलाया है कि रोजगार की खुशबू अपने ही गांव की मिट्टी से उठ सकती है। सहकारी समितियों के मार्गदर्शन में वैज्ञानिक तकनीक,ड्रिप सिंचाई और जैविक खाद के प्रयोग से इन फूलों की गुणवत्ता उत्कृष्ट रही। आने वाले दिनों में इन फूलों की सप्लाई श्रीनगर,ऋषिकेश,देहरादून और हरिद्वार के बाजारों में की जाएगी,जिससे किसानों को अच्छा लाभ मिलेगा। परियोजना प्रबंधक ने कहा हमारा लक्ष्य है कि सहकारी खेती के माध्यम से हर परिवार आत्मनिर्भर बने और पहाड़ से पलायन रुके। सामूहिक प्रयासों से ही ग्रामीण विकास का वास्तविक सपना साकार हो सकता है। अंत में समूह की महिलाओं ने फूलों की पहली फसल को मेहनत की खुशबू बताते हुए कहा इन फूलों में हमारी मेहनत,हमारी आशा और हमारे गांव का भविष्य खिला है। खेतों में खिले रंगीन फूल आज सहकारिता की उस कहानी को बयां कर रहे थे,जिसने न केवल मिट्टी की खुशबू बदली बल्कि लोगों के जीवन में नई रौनक भर दी।