
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान उत्तराखंड श्रीनगर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के संयुक्त तत्वावधान में 16-17 फरवरी 2026 को आयोजित द्वितीय अंतरराष्ट्रीय नवोन्मेषी अभियांत्रिकी अभिकल्प सम्मेलन (आईसीओआईईडी-2026) सफलता के साथ संपन्न हो गया। डिजाइन नवाचार केंद्र द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नवाचार,अनुसंधान और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग की भावना को साकार करता हुआ एक ऐतिहासिक शैक्षणिक मंच सिद्ध हुआ। सम्मेलन का आयोजन समन्वित पद्धति (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) में किया गया,जिससे देश-विदेश के शोधार्थियों,शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित हो सकी। दो दिवसीय इस वैचारिक महाकुंभ में छह प्रमुख व्याख्यान और बारह तकनीकी सत्र आयोजित किए गए,जिनमें अभियांत्रिकी अभिकल्प के समकालीन आयामों,उन्नत प्रौद्योगिकियों,सतत विकास,नवीन अभिकल्प पद्धतियों तथा औद्योगिक अनुप्रयोगों पर गंभीर और सारगर्भित विमर्श हुआ। सम्मेलन की शैक्षणिक गुणवत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुल 161 शोध-पत्र प्राप्त हुए,जिनमें से कठोर सहकर्मी समीक्षा प्रक्रिया के बाद 86 शोध-पत्रों को प्रस्तुतीकरण हेतु स्वीकृति प्रदान की गई। यह पारदर्शी और कठोर चयन प्रक्रिया सम्मेलन की उच्च अकादमिक स्तर को प्रमाणित करती है। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जर्मनी,संयुक्त राज्य अमेरिका,यूनाइटेड किंगडम,बांग्लादेश,नामीबिया तथा पोलैंड सहित छह देशों के शोधकर्ताओं ने भागीदारी करते हुए अपने शोध प्रस्तुत किए। विविध सांस्कृतिक और तकनीकी पृष्ठभूमियों से आए विद्वानों की सहभागिता ने इस आयोजन को वास्तविक वैश्विक स्वरूप प्रदान किया और ज्ञान-विनिमय की सशक्त परंपरा को आगे बढ़ाया। सम्मेलन को पांच विशिष्ट मुख्य व्याख्यानों ने विशेष रूप से समृद्ध किया। प्रख्यात विशेषज्ञ प्रो.डॉ.हेइनिंग जाइडलर,प्रो.जे.राम कुमार,प्रो.जय प्रकाश मिश्रा,प्रो.नरेश भटनागर तथा डॉ.तिमांशु भटनागर ने अभियांत्रिकी अभिकल्प की नवीन प्रवृत्तियों,नवाचार की चुनौतियों,उभरती प्रौद्योगिकियों और भविष्य की संभावनाओं पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए। उनके व्याख्यानों ने शोधार्थियों और विद्यार्थियों को नए दृष्टिकोण प्रदान किए तथा अनुसंधान की दिशा में नवचेतना का संचार किया। आयोजन में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान उत्तराखंड से अनुसंधान एवं परामर्श अधिष्ठाता डॉ.धर्मेन्द्र त्रिपाठी,अंतरराष्ट्रीय मामलों के अधिष्ठाता डॉ.जी.एस.बराड़,डिजाइन नवाचार केंद्र के समन्वयक डॉ.पवन कुमार राकेश,यांत्रिक अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष डॉ.अपूर्वा मोंडल,डॉ.टी.सुधाकर,डॉ.हितेश शर्मा तथा डॉ.विकास कुक्शाल सहित अनेक प्राध्यापकगण सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। वहीं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की से अभिकल्प विभागाध्यक्ष प्रो.अपूर्ब्ब कुमार शर्मा,डिजाइन नवाचार केंद्र समन्वयक एवं अवसंरचना अधिष्ठाता प्रो.इंदरदीप सिंह तथा मुख्य अतिथि शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो.नवीन कुमार ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। यह सम्मेलन केवल एक शैक्षणिक आयोजन भर नहीं रहा,बल्कि नवोन्मेषी अभियांत्रिकी अभिकल्प के क्षेत्र में विचार-मंथन,ज्ञान-साझेदारी और वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुआ। दो दिवसीय इस वैचारिक संगम ने यह संदेश दिया कि जब अग्रणी शैक्षणिक संस्थान समन्वित प्रयास करते हैं,तो अनुसंधान और नवाचार की नई दिशाएं खुलती हैं तथा तकनीकी प्रगति को नई गति मिलती है। समापन अवसर पर आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों,शोधकर्ताओं,मुख्य वक्ताओं और सहयोगी संस्थानों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय आयोजन भविष्य में भी अनुसंधान संस्कृति को सशक्त करेंगे और वैश्विक स्तर पर भारत की शैक्षणिक पहचान को और मजबूत बनाएंगे।