हिमालय टाइम्स
गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जिला सभागार में जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में मंगलवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में एंबुलेंस सेवाएं,दवाओं की उपलब्धता,संस्थागत प्रसव,गहन टीबी अभियान,निःशुल्क जांच योजना और प्रसव सेवाओं की स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक के दौरान जिलाधिकारी भदौरिया ने स्पष्ट कहा कि जनमानस को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर प्रसव संस्थागत हो और हर मरीज तक उपचार की सुविधा समय पर पहुंचे,यह सुनिश्चित किया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि 108 एंबुलेंस आपात स्थितियों में फर्स्ट रिस्पांडर के रूप में कार्य करती हैं,इसलिए उनका रिस्पॉन्स टाइम त्वरित और सटीक होना अनिवार्य है। उन्होंने सभी ब्लॉक चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिए कि एंबुलेंस वाहनों का स्वयं निरीक्षण कर उपकरण दवाएं और ड्राइवर की उपलब्धता की स्थिति सुनिश्चित करें। साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.शिव मोहन शुक्ला को निर्देशित किया कि एंबुलेंस की स्थिति पर चेकलिस्ट आधारित रिपोर्ट तैयार कर नियमित रूप से प्रस्तुत की जाए। दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा दवाओं का प्रिस्क्रिप्शन अस्पताल स्टॉक के अनुसार लिखा जाए। उन्होंने जन औषधि केंद्रों की दवाओं को प्राथमिकता देने और जनता को इनके प्रति जागरूक करने पर जोर दिया। पीसीपीएनडीटी एक्ट की समीक्षा में जिलाधिकारी ने अल्ट्रासाउंड केंद्रों की स्थिति की जानकारी लेते हुए कहा कि जहां-जहां डिलीवरी प्वाइंट हैं,वहां संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने आशा कार्यकर्त्रियों,ग्राम प्रधानों और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव हेतु प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि लेबर रूम का आधुनिकीकरण प्राथमिकता में रखा जाए ताकि सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित हो सके। गहन टीबी अभियान की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि एक्स-रे मशीनों की उपयोगिता,रिपोर्टिंग और मोबाइल एक्स-रे वैन की सक्रियता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सुभेद्य (दुर्गम) क्षेत्रों में मोबाइल एक्स-रे मशीनें भेजी जाएं,ताकि अधिकतम परीक्षण हो सके। साथ ही निक्षय पोषण योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए निक्षय मित्र समुदाय के साथ बेहतर समन्वय बनाने को कहा। उन्होंने कहा कि टीबी के उपचार में सही डायग्नोसिस और सतत रिपोर्टिंग सबसे महत्वपूर्ण है। जिलाधिकारी ने कहा कि विशेषज्ञ डॉक्टरों को आपातकालीन ड्यूटी में न लगाया जाए,ताकि उनकी विशेषज्ञता का पूर्ण उपयोग मरीजों के हित में हो सके। उन्होंने रेडियोलॉजिस्टों की तैनाती नीति पर भी दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि सप्ताह में दो दिन कोटद्वार से सतपुली और थलीसैंण से बीरोंखाल रेडियोलॉजिस्टों को भेजा जाए। बैठक में जननी सुरक्षा योजना,जननी शिशु सुरक्षा योजना,खुशियों की सवारी योजना तथा मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर जैसे स्वास्थ्य सूचकांकों पर चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना जिला प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिए कि एएनएम व अकुशल दाइयों की सूची तैयार कर उनका प्रशिक्षण कराया जाए। जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की समीक्षा करते हुए रेफर हुए बच्चों की जानकारी ली और स्कूल स्तर पर जागरूकता अभियान बढ़ाने की बात कही। साथ ही गैर-संचारी रोग नियंत्रण,हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के संचालन तथा राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि स्कूल और कॉलेजों में नशामुक्त भारत अभियान के तहत नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं और नशामुक्ति केंद्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। बैठक में आयुष्मान भारत मिशन,आरोग्य शिविरों और स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के घटकों पर चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि कार्यदायी संस्थाओं के साथ नियमित समन्वय कर अस्पतालों की मॉनिटरिंग और गुणवत्ता जांच की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण और शहरी,दोनों ही क्षेत्रों में हर नागरिक को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मिले। बैठक में सीएमओ डॉ.शिव मोहन शुक्ला,एसीएमओ डॉ.विनय कुमार त्यागी,डीएसपी (इंटेलिजेंस),विभिन्न ब्लॉक चिकित्साधिकारी तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। यह समीक्षा बैठक न केवल आंकलन भर रही,बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में प्रशासनिक दृढ़ता का परिचायक भी बनी। जिलाधिकारी भदौरिया ने कहा कि सुविधाएं तभी सार्थक हैं,जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। हर मरीज को बेहतर सेवा,हर प्रसव सुरक्षित और हर गांव स्वस्थ हो यही हमारा लक्ष्य है।