
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित किया गया यह केंद्रीय बजट रिफॉर्म संरचनात्मक सुधार के उद्देश्य से तैयार किया गया है,जो दीर्घकाल में देश के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है। हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर से वाणिज्य विभाग के असिस्टेंट प्रो.डॉ.कमाल अहमद ने कहा कि देश की वित्त मंत्री निर्मला सीता रमण ने इस बजट में पर्यटन,सेवाक्षेत्र,चिकित्सा,बैंकिंग,टेक्सटाइल,एमएसएमई तथा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया है,जो देश की आर्थिक नींव को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर और एमएसएमई पर केंद्रित नीतियां निवेश को प्रोत्साहित करेंगी और अर्थव्यवस्था को गति देंगी। डॉ.अहमद ने बजट में युवा एवं महिलाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए प्रस्तावित नए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स को सराहनीय बताते हुए कहा कि इससे दीर्घकाल में कुशल मानव संसाधन का विकास होगा। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें कार्यबल से जोड़ने के प्रयास बजट की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। हालांकि उन्होंने बजट के कुछ पहलुओं पर चिंता भी व्यक्त की। डॉ.अहमद के अनुसार प्रत्यक्ष रोजगार सृजन को लेकर बजट में कोई ठोस और स्पष्ट प्रावधान नहीं दिखाई देता,जिससे देश के शिक्षित बेरोजगार युवाओं में निराशा का भाव है। रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं के लिए यह बजट अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा नहीं उतर सका। उन्होंने कहा कि आयकर स्लैब में किसी प्रकार का परिवर्तन न होना और करदाताओं को राहत देने के लिए आयकर छूट की सीमा बढ़ाने या अन्य कर रियायतों की घोषणा न किए जाने से मध्यम वर्ग एवं वेतनभोगी करदाताओं में मायूसी देखने को मिल रही है। महंगाई के इस दौर में करदाताओं को राहत की उम्मीद थी,जो इस बजट में पूरी नहीं हो सकी। डॉ.कमाल अहमद ने कहा कि यह बजट नीति सुधार और आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक ठोस प्रयास अवश्य है,लेकिन रोजगार सृजन और कर सुधार जैसे संवेदनशील विषयों पर और अधिक ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि इन क्षेत्रों पर भविष्य में विशेष ध्यान दिया जाता है,तो यह बजट वास्तव में आम आदमी के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। कुल मिलाकर यह बजट दीर्घकालिक आर्थिक सुधारों की नींव रखने वाला दस्तावेज है,जो विकास की दिशा तो स्पष्ट करता है,लेकिन आम नागरिक,युवा और करदाता वर्ग की कुछ प्रमुख अपेक्षाओं को अधूरा भी छोड़ जाता है।