
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। आमजन को धमकाकर अवैध वसूली करने वाले शातिर गिरोह के खिलाफ पौड़ी पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए तीन आरोपियों को हरियाणा से गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। यह कार्रवाई न केवल पुलिस की तत्परता का उदाहरण है,बल्कि ऐसे आपराधिक तत्वों के खिलाफ सख्त संदेश भी देती है। मामले की शुरुआत 13 फरवरी 2026 को हुई,जब श्रीनगर निवासी एस.के.जैन ने कोतवाली श्रीनगर में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि अक्षत नामक व्यक्ति और उसके साथियों ने उनके रेस्टोरेंट के भोजन में कॉकरोच मिलने का आरोप लगाते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) में 10 लाख रुपये का जुर्माना लगवाने,प्रतिष्ठान को बदनाम करने और फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी। इस दबाव के चलते आरोपियों ने ब्लैकमेल कर उनकी पुत्री से 50 हजार रुपये की ठगी कर ली। घटना को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी सर्वेश पंवार ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रभारी निरीक्षक श्रीनगर कुलदीप नेगी के पर्यवेक्षण और उपनिरीक्षक मुकेश भट्ट के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित कर मामले की गहन विवेचना शुरू की गई। जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि आरोपी अक्षत आनंद उर्फ साहिल,सोहेल अख्तर और रितेश मिश्रा ने सुनियोजित तरीके से 24 नवंबर 2025 को श्रीनगर स्थित एक रेस्टोरेंट में भोजन किया और बाद में खाने में कॉकरोच होने का वीडियो बनाकर उसे हथियार बना लिया। इसके बाद उन्होंने रेस्टोरेंट संचालक को डराने के लिए फर्जी नोटिस तैयार कर संदेश सेवा माध्यम (व्हाट्सएप) के जरिए भेजा और एफएसएसएआई में शिकायत करने की धमकी दी। आरोपियों ने रेस्टोरेंट की प्रतिष्ठा धूमिल करने,कानूनी नोटिस भेजने और वीडियो वायरल करने का भय दिखाकर करीब 2.5 लाख रुपये की मांग की। लगातार कॉल और संदेशों के जरिए दबाव बनाते हुए उन्होंने पहली किश्त के रूप में 50 हजार रुपये डिजिटल भुगतान (यूपीआई) के माध्यम से अपने साथी के खाते में मंगवा लिए। पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों,बैंक विवरण और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों की लोकेशन का पता लगाते हुए उन्हें हरियाणा के झज्जर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। विवेचना के दौरान साजिश में शामिल अन्य आरोपियों को भी विधिक प्रावधानों के तहत नोटिस दिया गया था,लेकिन सहयोग न करने पर उन्हें भी गिरफ्तार किया गया। इस पूरी कार्रवाई में उपनिरीक्षक मुकेश भट्ट,कांस्टेबल मुकेश सिंह एवं कांस्टेबल सोहेब (सीआईयू) की अहम भूमिका रही। पौड़ी पुलिस की इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि अपराध चाहे जितना भी सुनियोजित क्यों न हो,कानून के हाथों से बच पाना संभव नहीं। साथ ही यह घटना आमजन को भी सचेत करती है कि किसी भी प्रकार की ब्लैकमेलिंग या धमकी की स्थिति में तत्काल पुलिस की शरण लेना ही सबसे उचित कदम है।