
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने लैंसडाउन क्षेत्र में लगातार बढ़ रही जंगली जानवरों की घटनाओं पर विधायक दिलीप रावत द्वारा दिए गए इस्तीफे संबंधी बयान को सिर्फ ढकोसला और जनता को भ्रमित करने का प्रयास बताया है। उन्होंने कहा कि जनता सब जानती है और इस प्रकार की घोषणाएं सिर्फ दुखी और आतंकित ग्रामीणों की भावनाओं से खिलवाड़ हैं। धीरेंद्र प्रताप मंगलवार कोटद्वार में आयोजित कांग्रेस के नवनियुक्त जिला अध्यक्ष विकास नेगी के कार्यग्रहण समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। यहीं उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में सरकार और स्थानीय विधायक पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार वन्यजीवों द्वारा जान गंवाने वाले परिवारों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा करती है,लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। उन्होंने बताया कि अब तक किसी भी परिवार को 10 लाख रुपये पूर्ण राशि नहीं मिली है। अधिकांश मामलों में वन विभाग के अधिकारी केवल 2 लाख रुपये देकर वापस लौट गए। पीड़ित परिवार आज भी मुआवजे और सुरक्षा उपायों के इंतजार में हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के झूठे वादे अब लोगों के जीवन से खेलने लगे हैं। यह सिर्फ कागजों में दिखाई देने वाली घोषणा है,जमीन पर इसका कोई प्रभाव नहीं। धीरेंद्र प्रताप ने कार्यकर्ताओं और जनता से 14 दिसंबर को दिल्ली में आयोजित विशाल रैली में शामिल होने का आह्वान किया। रैली का उद्देश्य-वोट चोरों,गद्दी छोड़ो अभियान को ताकत देना,लोकतंत्र पर हो रहे प्रहारों का विरोध,जनता की आवाज को संसद और देश के सामने मजबूती से रखना। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे रामलीला मैदान में इस ऐतिहासिक सभा को संबोधित करेंगे। यह रैली देश की दिशा तय करने वाली साबित होगी। धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि वर्तमान में वे 14 दिसंबर की रैली के लिए जनसमर्थन जुटाने में जुटे हैं। इसके बाद वे लैंसडाउन विधानसभा,गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र और ऐसे सभी गांव जहां जंगली जानवरों के आतंक ने जीवन दूभर कर दिया है,दौरा कर पीड़ितों से मिलेंगे और उनकी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाएंगे। धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि दिलीप रावत द्वारा दिया गया इस्तीफा संबंधी बयान सिर्फ सुर्खियां बटोरने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा यदि वाकई संवेदनशीलता होती तो क्षेत्र में सुरक्षा दी जाती,मुआवजा पूरा दिया जाता और जंगली जानवरों से निपटने के प्रभावी कदम लिए जाते। केवल बयानबाजी से जनता का भला नहीं होता।