वर्ष 2026 शिक्षा परिवर्तन का वर्ष: पीजीआई रैंकिंग व जीईआर सुधार पर विशेष फोकस

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। वर्ष 2026 प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी साबित होने जा रहा है। नई शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत शिक्षा के

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। वर्ष 2026 प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी साबित होने जा रहा है। नई शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत शिक्षा के विस्तारीकरण,गुणवत्ता सुधार और सुदृढ़ीकरण के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) में वृद्धि तथा पीजीआई (परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स) रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार कर प्रदेश को देशभर में दो अंकों से नीचे की रैंकिंग में स्थापित करना है। शिक्षा विभाग द्वारा विद्या समीक्षा केन्द्र को और अधिक सशक्त करते हुए प्रदेश के शत-प्रतिशत विद्यालयों को इससे जोड़ा जाएगा,ताकि सभी विद्यालयों से संबंधित शैक्षणिक,प्रशासनिक और अकादमिक डाटा एक क्लिक पर उपलब्ध हो सके। इससे नीति निर्माण,मूल्यांकन और निगरानी व्यवस्था को नई गति मिलेगी। राज्य पाठ्यचर्या होगी लागू,व्यावसायिक शिक्षा पर विशेष जोर नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप एससीईआरटी द्वारा तैयार राज्य पाठ्यचर्या को वर्ष 2026 से लागू किया जाएगा। इस पाठ्यचर्या में पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु 240 दिवस का शैक्षणिक कैलेंडर निर्धारित किया गया है,जिसमें 200 दिवस पठन-पाठन,20 दिवस परीक्षा एवं मूल्यांकन तथा 10-10 दिवस बस्ता रहित दिवस एवं अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए नियत किए गए हैं। कक्षा 11 से विद्यार्थियों को अपनी रुचि के अनुसार विषय चयन की स्वतंत्रता दी जाएगी,जिससे वे भविष्य की आवश्यकताओं और अपने करियर लक्ष्य के अनुरूप अध्ययन कर सकेंगे। यह नई पाठ्यचर्या विद्यालयों की कार्य संस्कृति,शिक्षण प्रक्रिया और मूल्यांकन प्रणाली में व्यापक बदलाव लाने में सक्षम होगी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) के ढांचे का पुनर्गठन किया जाएगा। इसके लिए यूजीसी मानकों के अनुरूप नई सेवा नियमावली तैयार की जाएगी तथा पृथक शिक्षक संवर्ग का गठन होगा। इससे शिक्षक प्रशिक्षण,अनुसंधान और शैक्षणिक नवाचारों में अपेक्षित सुधार आएगा,जिसका सीधा लाभ प्रदेश के शिक्षकों और विद्यार्थियों को मिलेगा। जीईआर और पीजीआई रैंकिंग सुधार के लिए ठोस रणनीति विद्यालयी शिक्षा में पीजीआई रैंकिंग को बेहतर बनाने के लिए सूचकांकों पर आधारित ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। विभागीय स्तर पर प्रशिक्षण,सतत मूल्यांकन और निगरानी को मजबूत किया जाएगा। साथ ही प्रदेश में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) बढ़ाने के लिए विद्यालयों में भौतिक संसाधनों और मानव संसाधनों का चरणबद्ध विकास किया जाएगा तथा बालिका शिक्षा को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। 6000 से अधिक रिक्त पदों पर होगी भर्ती नववर्ष 2026 में शिक्षा विभाग के अंतर्गत 6000 से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। प्राथमिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक (बेसिक) के 1670 पद,सहायक अध्यापक (विशेष शिक्षा) के पद,जबकि माध्यमिक शिक्षा विभाग में प्रवक्ता के 808 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इसके अतिरिक्त सहायक अध्यापक एलटी के एक हजार से अधिक पद,समग्र शिक्षा के अंतर्गत 324 लेखाकार कम सपोर्टिंग स्टाफ,161 विशेष शिक्षक,95 कैरियर काउंसलर तथा विद्या समीक्षा केन्द्र के 18 पद भरे जाएंगे। विभिन्न कार्यालयों व विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी के 2364 पदों को आउटसोर्स के माध्यम से भरा जाएगा। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा,वर्चुअल कक्षाओं का विस्तार प्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल शिक्षा को नई दिशा दी जा रही है। इसके तहत 840 राजकीय विद्यालयों को वर्चुअल क्लास नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। हाइब्रिड मोड में वर्चुअल व स्मार्ट क्लास के माध्यम से शिक्षण कार्य संचालित होगा,जिससे सीमांत एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी उच्च स्तरीय शिक्षा का लाभ मिलेगा। वर्तमान में प्रदेश के 500 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास संचालित हैं। कलस्टर विद्यालय,एनसीसी व गुरुकुल शिक्षा को बढ़ावा नई शिक्षा नीति के अनुरूप प्रदेश में कलस्टर विद्यालयों की स्थापना की जाएगी। माध्यमिक स्तर पर 559 तथा प्राथमिक स्तर पर 679 विद्यालयों को कलस्टर विद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा,जहां सभी विषयों के शिक्षक और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही स्काउट्स एंड गाइड्स से दो लाख विद्यार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है तथा एनसीसी की 7500 सीटों को भरते हुए अधिकतर विद्यालयों में एनसीसी इकाइयों का गठन किया जाएगा। संस्कृत शिक्षा के अंतर्गत प्रत्येक जनपद में गुरुकुल पद्धति पर आधारित विद्यालय तथा पिछड़े विकासखंडों में आश्रम पद्धति आवासीय विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। वर्ष 2026 को शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार,गुणवत्ता,समानता और तकनीकी सशक्तिकरण का वर्ष बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग गंभीर प्रयास कर रहे हैं। जीईआर,पीजीआई रैंकिंग,डिजिटल शिक्षा और शिक्षक भर्ती जैसे महत्वपूर्ण कदम प्रदेश को शैक्षिक रूप से नई ऊंचाइयों तक ले जाने में निर्णायक सिद्ध होंगे।

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