हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान श्रीनगर में महिलाएं विकसित भारत की उत्प्रेरक विषय पर एक प्रेरक एवं चिंतनपरक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संस्थान की संस्थागत नवाचार परिषद तथा अनुसंधान एवं परामर्श प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करना तथा विकसित भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को सशक्त रूप से सामने लाना था। कार्यक्रम के संरक्षक के रूप में संस्थान के निदेशक प्रो.के.के.शुक्ला उपस्थित रहे। मुख्य वक्ताओं के रूप में Indian Institute of Technology Roorkee के निदेशक प्रो.के.के.पंत तथा Advanced Materials and Processes Research Institute के निदेशक प्रो.टी.भास्कर ने अपने विचार रखे। दोनों विद्वानों ने विज्ञान,प्रौद्योगिकी,अभियंत्रण एवं गणित (एसटीईएम) के क्षेत्र में महिलाओं की उल्लेखनीय प्रगति और उनके योगदान को राष्ट्र की उन्नति का आधार बताया। मुख्य वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी केवल समानता का प्रश्न नहीं,बल्कि नवाचार,सतत विकास और सामाजिक परिवर्तन की आधारशिला है। उन्होंने छात्राओं को अनुसंधान,नवप्रवर्तन आधारित उद्यम (स्टार्टअप) तथा तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया। वक्ताओं ने इस बात पर भी बल दिया कि यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो विज्ञान में महिला प्रतिभाओं को अवसर,संसाधन और नेतृत्व की भूमिका प्रदान करनी होगी। कार्यक्रम के संयोजक डॉ.धर्मेंद्र त्रिपाठी अधिष्ठाता अनुसंधान एवं परामर्श रहे,जबकि समन्वयक के रूप में डॉ.पंकज पाल एवं डॉ.शशांक भट्टरा ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। संगोष्ठी में छात्र-छात्राओं,शोधार्थियों और संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने विज्ञान के क्षेत्र में अवसरों अनुसंधान अनुदान और महिला वैज्ञानिकों के सामने आने वाली चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा,बल्कि यह विचारों का ऐसा मंच बना जहां विज्ञान और महिला शक्ति के समन्वय से विकसित भारत की परिकल्पना को नई ऊर्जा मिली। संगोष्ठी ने स्पष्ट संदेश दिया कि जब विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं को समान अवसर और नेतृत्व प्रदान किया जाएगा तभी भारत आत्मनिर्भर,नवाचारी और विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व पटल पर अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर सकेगा। एनआईटी उत्तराखंड का यह आयोजन युवा पीढ़ी को विज्ञान एवं अनुसंधान के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल सिद्ध हुआ।