शंकराचार्य से पुलिस व्यवहार पर उबाल-संत किसान और पूर्व सैनिक एक स्वर में मुखर

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन संगम नोज पर ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज एवं उनके शिष्यों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा किए गए

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन संगम नोज पर ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज एवं उनके शिष्यों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा किए गए कथित दुर्व्यवहार,बल प्रयोग और अपमानजनक आचरण के विरोध में मंगलवार को मातृ सदन,हरिद्वार में व्यापक जनाक्रोश देखने को मिला। इस अवसर पर आयोजित जनाक्रोश बैठक एवं प्रेस वार्ता में संत समाज,किसान संगठनों,जनआंदोलनों,बेरोजगार मंच,महिला मंच,पूर्व सैनिक संगठनों तथा बड़ी संख्या में जागरूक नागरिकों ने भाग लिया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह घटना केवल प्रशासनिक चूक नहीं,बल्कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा,सनातन संस्कृति और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा आक्रमण है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर सर्वोच्च आध्यात्मिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। किसान मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं उपाध्यक्ष भोपाल सिंह चौधरी ने कहा कि संतों,किसानों और आम नागरिकों के आत्मसम्मान के साथ इस प्रकार का व्यवहार लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं है। उत्तराखंड युवा एकता मंच के संयोजक पीयूष जोशी ने भी घटना को सरकार का अत्यंत निंदनीय और असंवेदनशील कृत्य बताया। सभा को संबोधित करते हुए परम पूज्य स्वामी शिवानंद महाराज ने कहा कि शंकराचार्य जैसे सर्वोच्च आध्यात्मिक पद पर आसीन संत से 24 घंटे में उनकी प्रामाणिकता सिद्ध करने की मांग करना भारत की आत्मा पर प्रहार है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी मेला अधिकारी या प्रशासनिक पदाधिकारी को यह अधिकार किसने दिया कि वह शंकराचार्य की वैधता पर प्रश्न करे। स्वामी शिवानंद ने संत समाज की चुप्पी पर भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह मौन अज्ञान नहीं,बल्कि सत्ता से निकटता बनाए रखने की मानसिकता का परिणाम है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आज शंकराचार्य पर प्रहार हो रहा है और संत समाज मूकदर्शक बना हुआ है,तो आने वाले समय में यही स्थिति हर संन्यासी,हर आश्रम और हर आध्यात्मिक परंपरा के साथ दोहराई जाएगी। उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता कैप्टन राकेश ध्यानी ने कहा कि यह घटना प्रशासनिक संवेदनहीनता और नैतिक पतन का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आस्था के केंद्रों पर हो रहे इस प्रकार के हस्तक्षेप से समाज का विश्वास टूट रहा है। पूर्व नौसेना अधिकारी एवं उत्तराखंड भूतपूर्व सैनिक संगठन के संरक्षक प्रकाश चंद थपलियाल ने इसे संस्कृति और विश्वास पर सीधा हमला बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं पूरे समाज की चेतना को झकझोर देती हैं। डॉ.विजय वर्मा ने कहा कि देश की संस्थाओं को क्रमबद्ध रूप से कमजोर किया जा रहा है और अब सीधा हमला समाज के मूल विश्वासों पर हो रहा है। दंडी स्वामी देवाश्रम ने कहा कि यह घटना उन तत्वों की मानसिकता को उजागर करती है जिन्हें वास्तविक आध्यात्मिक चेतना से भय है। महिला मंच की ओर से सुनीता ने कहा कि वर्तमान दौर में समाज के साथ-साथ महिलाओं की गरिमा पर भी आघात हो रहा है,जो अत्यंत चिंताजनक है। बैठक के अंत में मातृ सदन हरिद्वार की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह मामला केवल विरोध तक सीमित नहीं रहेगा। आयोजकों ने ऐलान किया कि इस प्रकरण को अंजाम देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विधिक,संवैधानिक और लोकतांत्रिक माध्यमों से न्याय प्राप्त करने तक संघर्ष जारी रहेगा,साथ ही फौजदारी एवं सिविल मानहानि की कार्रवाई भी की जाएगी। संत समाज के सम्मान और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने का संकल्प भी दोहराया गया। इस दौरान स्वामी करणगिरी,प्रफुल्ल श्यानी,दिनेश वालिया सहित अनेक संतों,सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने भी अपने विचार रखे।

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