शकट चौथ व्रत-संतान सुख,परिवार की समृद्धि और संकट निवारण का पावन पर्व–अखिलेश चंद्र चमोला

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला शकट (संकट) चौथ व्रत आस्था,श्रद्धा और मातृत्व भावनाओं से जुड़ा एक

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला शकट (संकट) चौथ व्रत आस्था,श्रद्धा और मातृत्व भावनाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान गणेश एवं शकट माता को समर्पित होता है,जिसे माताएं अपनी संतान की दीर्घायु,उत्तम स्वास्थ्य,सुख-समृद्धि एवं समस्त संकटों से रक्षा की कामना के साथ श्रद्धापूर्वक रखती हैं। वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 6 जनवरी को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं और उनकी आराधना से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से किया गया व्रत परिवार में सुख-शांति,मानसिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। व्रती महिलाएं दिनभर उपवास रखकर संध्या के समय चंद्र दर्शन के उपरांत व्रत का पारण करती हैं। पौराणिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार एक समय भगवान श्रीकृष्ण के शैशव रूप पर एक भारी शकट (छकड़ा) गिरने का संकट उत्पन्न हुआ था,जिसे बालकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से नष्ट कर दिया। इसी स्मृति में इस तिथि को शकट चौथ कहा गया। यह व्रत संकटों के नाश और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है। पूजन विधि-शकट चौथ के दिन महिलाएं प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा अथवा चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान गणेश को तिल,गुड़,गन्ना,लड्डू और फल अर्पित किए जाते हैं। इस दौरान गणेश चालीसा एवं व्रत कथा का पाठ किया जाता है। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित कर व्रत पूर्ण किया जाता है। इस दिन काले तिल,गुड़,अनाज,गर्म वस्त्र,तांबे के पात्र और दक्षिणा का दान शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भूखे व्यक्ति को भोजन कराना सबसे श्रेष्ठ दान है,जिससे पुण्य फल की प्राप्ति होती है। शुभ मुहूर्त धार्मिक पंचांग के अनुसार शकट चौथ का व्रत-6 जनवरी 2026 को प्रातः 8:01 बजे से प्रारंभ होकर 7 जनवरी 2026 को प्रातः 6:52 बजे तक रहेगा। इस दिन चंद्रोदय रात्रि 8:54 बजे होगा। सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व-शकट चौथ व्रत केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है,बल्कि यह मातृत्व,त्याग,पारिवारिक दायित्व और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। ग्रामीण अंचलों में यह पर्व लोकगीतों,कथाओं और सामूहिक पूजा के माध्यम से सामाजिक एकता को सुदृढ़ करता है। शकट चौथ व्रत यह संदेश देता है कि श्रद्धा,संयम और विश्वास से जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है। यह पर्व भारतीय संस्कृति में निहित पारिवारिक मूल्यों,मातृत्व की शक्ति और आध्यात्मिक चेतना को और अधिक सशक्त करता है।

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