
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। स्वतंत्रता,बलिदान और जनसंघर्ष की गौरवगाथा को स्मरण कराने वाला मोलू भरदारी एवं नागेंद्र सकलानी शहीदी मेला इस वर्ष भी कीर्तिनगर नगर पंचायत क्षेत्र में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। चार दिवसीय इस ऐतिहासिक मेले में जहां एक ओर शहीदों की स्मृति को नमन किया जाएगा,वहीं दूसरी ओर महिला वॉलीबॉल और कबड्डी प्रतियोगिताएं मेले का मुख्य आकर्षण रहेंगी। नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी कु.शालनी नेगी ने बताया कि शहीदी मेले की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। मेले में सांस्कृतिक,रंगारंग कार्यक्रमों,महिला कीर्तन प्रतियोगिताओं के साथ-साथ बालक-बालिका खेल प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। विशेष रूप से इस बार उम्रदराज महिलाओं की वॉलीबॉल एवं कबड्डी प्रतियोगिताएं आयोजन की नई पहचान बनेंगी,जो महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सहभागिता का सशक्त संदेश देंगी। उन्होंने बताया कि इस अभिनव पहल का विचार वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र गौड़ द्वारा सुझाया गया है,जो पूरे उत्तराखंड में माध्यमिक वर्ग बालिका एवं उम्रदराज महिलाओं की क्रिकेट प्रतियोगिताओं के जन्मदाता माने जाते हैं। दशकों से महिला खेलों को बढ़ावा देते आ रहे देवेंद्र गौड़ ने कीर्तिनगर उप जिलाधिकारी मंजू राजपूत के माध्यम से नगर पंचायत को पत्र भेजकर शहीदी मेले में महिला खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने का प्रस्ताव दिया था,जिसे नगर पंचायत ने सहर्ष स्वीकार किया। कु.शालनी नेगी ने कहा कि देवेंद्र गौड़ का यह संकल्प कि खेलेगी मां तो सीखेंगे बच्चे केवल नारा नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा है। यह आयोजन निश्चित रूप से मेले को नई पहचान देगा और महिला सहभागिता को मजबूती प्रदान करेगा। शहीदी मेले का ऐतिहासिक महत्व-यह शहीदी मेला केवल उत्सव नहीं बल्कि टिहरी जनपद के जनआंदोलन और बलिदान की जीवंत स्मृति है। देश भले ही अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हो गया हो,लेकिन टिहरी रियासत सामंतशाही से मुक्त नही हो पाई थी महाराजा सामंतशाही के अत्याचारों से मुक्त नहीं हो पाई थी। सामंतशाही के खिलाफ जनता ने विद्रोह का बिगुल फूंका,जिसका नेतृत्व दादा दौलतराम ने किया। इसी जनआंदोलन के दौरान मोलू भरदारी और नागेंद्र सकलानी को कीर्तिनगर में ही राजा के कारिंदों ने गोली मार दी थी। इन अमर शहीदों की स्मृति में विगत चार दशकों से नगर पंचायत द्वारा शहीदी मेले का आयोजन किया जा रहा है,जो जनसंघर्ष,लोकतांत्रिक चेतना और बलिदान की परंपरा को जीवंत बनाए हुए है। शहीदों को श्रद्धांजलि और समाज को संदेश-शहीदी मेला आज केवल ऐतिहासिक स्मृति नहीं,बल्कि सांस्कृतिक चेतना,सामाजिक एकता और युवा-महिला सशक्तिकरण का मंच बन चुका है। खेल प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ने का यह एक सार्थक प्रयास है। इस संबंध में नगर पंचायत अध्यक्ष राकेश मोहन मैठाणी से संपर्क करने का प्रयास किया गया किंतु उनसे संपर्क नहीं हो सका।