
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के लोक कला निष्पादन केंद्र श्रीनगर में बुधवार को एक गरिमामय स्वागत एवं अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन शैलनट परिवार श्रीनगर गढ़वाल की ओर से किया गया,जिसमें केंद्र के नवनियुक्त निदेशक गणेश कुकशाल गणी,उपनिदेशक डॉ.संजय पाण्डेय तथा उपनिदेशक डॉ.महेंद्र पंवार का सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शैलनट अध्यक्ष अभिषेक बहुगुणा ने की,जबकि संचालन संस्था के सचिव पंकज नैथानी ने कुशलतापूर्वक निभाया। शैलनट परिवार ने इन तीनों हस्तियों की नियुक्ति को गढ़वाल-कुमाऊं की समृद्ध लोक संस्कृति के लिए एक सकारात्मक ऊर्जा और उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम बताया। गणेश कुकशाल को गढ़वाली बोली-भाषा और संस्कृति का पुरोधा माना जाता है। डॉ.संजय पाण्डेय कुमाऊनी-गढ़वाली लोकगायन की दुनिया में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। वहीं डॉ.महेंद्र पंवार एनएसडी से प्रशिक्षित,रंगमंच के चर्चित कलाकार और रंगकर्मी के रूप में ख्यात हैं। इन तीनों के अनुभव और विशेषज्ञता से लोक कला निष्पादन केंद्र को नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई गई। अपने स्वागत से अभिभूत होकर तीनों विद्वानों ने शैलनट परिवार का आभार प्रकट किया। उन्होंने केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का संकल्प लेते हुए कहा कि वे लोक संस्कृति के संवर्धन हेतु अपना शत-प्रतिशत योगदान देंगे और समाज के सभी वर्गों से सहयोग की अपेक्षा रखते हैं। इस अवसर पर संस्था और क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं। जिनमें वरिष्ठ कवि नीरज नैथानी,शिक्षक महेश गिरि,कवि-चित्रकार जयकृष्ण पैन्यूली माटी,गढ़कवि देवेन्द्र उनियाल,शिक्षक हेमचंद्र ममगाई,गढ़वाल वाक संयोजक प्रिंस गिरि,युवा रंगकर्मी अंकित भट्ट,पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अंकित उछोली,रोटेरियन प्रदीप अंथवाल,श्रीकांत सहित अन्य साहित्यकार,रंगकर्मी,शिक्षाविद व सांस्कृतिक प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम एक आत्मीय,रचनात्मक और उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह आयोजन न केवल शैलनट परिवार की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है,बल्कि गढ़वाल-कुमाऊं की समृद्ध लोक संस्कृति को नई ऊर्जा देने वाला एक ऐतिहासिक क्षण भी साबित हुआ।