
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग एवं भौतिक विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) प्रायोजित 10 दिवसीय शोध पद्धति कार्यशाला का दसवां एवं अंतिम दिन अत्यंत गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यशाला शोधार्थियों के लिए ज्ञान,नवाचार और आधुनिक तकनीकों के समन्वय का एक सशक्त मंच बनकर उभरी। कार्यक्रम के प्रथम एवं द्वितीय सत्र में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान के सह-आचार्य डॉ.अमित गौतम ने शोध के आधुनिक डिजिटल उपकरणों की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को रिसर्च रैबिट एवं सेमांटिक स्कॉलर जैसे शोध सहायक मंचों का परिचय देते हुए बताया कि किस प्रकार ये उपकरण शोध कार्य को सरल,प्रभावी और व्यवस्थित बनाते हैं। साथ ही जोतेरो के माध्यम से संदर्भ प्रबंधन की प्रक्रिया को सहज रूप में समझाया गया।उन्होंने रिसर्चर लाइफ एवं कोबो टूलबॉक्स जैसे अन्य उपयोगी उपकरणों के प्रयोग पर भी विस्तार से जानकारी दी तथा प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान कर उन्हें व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया। तृतीय सत्र में डॉ.आलोक कुमार गौतम ने सतत जीवन और स्वस्थ पृथ्वी विषय पर व्याख्यान देते हुए वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती-जलवायु परिवर्तन पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय असंतुलन मुख्यतः मानवीय गतिविधियों का परिणाम है,जिसका सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण समुदायों, किसानों और शहरी गरीबों पर पड़ रहा है। उन्होंने समाधान के रूप में सादगीपूर्ण और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने पर जोर देते हुए साइकिल के उपयोग,जैविक खाद्य पदार्थों के सेवन,ऊर्जा संरक्षण,कचरा प्रबंधन एवं पुनर्चक्रण जैसे उपायों को आवश्यक बताया। समापन सत्र में अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो.त्रिलोक चंद्र उपाध्याय ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ.अमित गौतम उपस्थित रहे,जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान श्रीनगर के कुलसचिव हरि मौल आजाद ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.अनिल कुमार नौटियाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि हरि मौल आजाद ने अपने संबोधन में शोध क्षेत्र में हो रहे नवाचारों की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय के इस प्रयास को अनुकरणीय बताया तथा भविष्य में अपने संस्थान में भी इस प्रकार की कार्यशालाओं के आयोजन की इच्छा व्यक्त की। मुख्य अतिथि डॉ.अमित गौतम ने कार्यशाला के सफल आयोजन की सराहना करते हुए कोर्स निदेशक डॉ.देवेंद्र सिंह एवं सह-निदेशक डॉ.आलोक सागर गौतम को आश्वस्त किया कि भविष्य में राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान एवं गढ़वाल विश्वविद्यालय के बीच शोध के क्षेत्र में संयुक्त सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने आगामी कार्यशालाओं हेतु वित्तीय सहयोग की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो.त्रिलोक चंद्र उपाध्याय ने सभी प्रतिभागियों को शोध कार्य में धैर्य,अनुशासन और निरंतरता बनाए रखने की प्रेरणा दी। वहीं प्रो.अनिल कुमार नौटियाल ने शोधार्थियों को नैतिकता और गुणवत्ता के साथ शोध करने का संदेश देते हुए भविष्य की चुनौतियों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम का स्वागत वक्तव्य डॉ.आलोक सागर गौतम द्वारा प्रस्तुत किया गया,जिसमें उन्होंने 10 दिवसीय कार्यशाला को सफल बनाने में सभी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ.देवेंद्र सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने शिक्षा एवं भौतिक विज्ञान विभाग सहित कार्यक्रम से जुड़े सभी सहयोगियों का धन्यवाद करते हुए कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह के मार्गदर्शन और सहयोग को विशेष रूप से सराहा। यह 10 दिवसीय शोध पद्धति कार्यशाला न केवल शोधार्थियों के लिए ज्ञानवर्धन का मंच बनी,बल्कि उन्हें आधुनिक शोध तकनीकों,सामाजिक सरोकारों और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देने में भी पूर्णतः सफल रही।