
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की महत्वपूर्ण शैक्षणिक,सांस्कृतिक एवं धार्मिक नगरी श्रीनगर में गरीबों,निराश्रितों और बेसहारा लोगों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए रैन बसेरे की बदहाल स्थिति सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आ गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-07 पर टैक्सी स्टैंड के समीप स्थित रैन बसेरे का महापौर आरती भण्डारी ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सामने आई अव्यवस्थाओं और रैन बसेरे के कथित दुरुपयोग को गंभीरता से लेते हुए महापौर ने कड़ा रुख अपनाया तथा रैन बसेरे को तत्काल प्रभाव से बंद करने के निर्देश दिए। साथ ही,उन्होंने स्पष्ट किया कि इस जनहितकारी सुविधा को जल्द नए सिरे से तैयार कर बेहतर व्यवस्थाओं के साथ संचालित किया जाएगा। रैन बसेरे का मूल उद्देश्य ऐसे लोगों को सुरक्षित और सम्मानजनक ठिकाना उपलब्ध कराना है,जिनके पास रात बिताने के लिए उचित स्थान नहीं होता। विशेषकर गरीब,निराश्रित,बेसहारा और विषम परिस्थितियों में शहर पहुंचने वाले लोगों के लिए इस प्रकार की सुविधा बेहद महत्वपूर्ण होती है। लेकिन जब जरूरतमंदों के लिए बनाई गई व्यवस्था ही अव्यवस्थाओं और दुरुपयोग की भेंट चढ़ने लगे,तो उसके संचालन और रखरखाव पर सवाल उठना स्वाभाविक है। महापौर आरती भण्डारी के औचक निरीक्षण के दौरान रैन बसेरे की स्थिति सामने आने पर उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। जनहित में स्थापित इस सुविधा का उद्देश्य से इतर इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने रैन बसेरे को तत्काल बंद करने के निर्देश दिए,ताकि इसकी व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर नए सिरे से संचालन की दिशा में कदम उठाया जा सके।जनसुविधाओं के नाम पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं
महापौर आरती भण्डारी ने स्पष्ट किया कि नगर निगम की प्राथमिकता शहर के नागरिकों के साथ-साथ जरूरतमंद और असहाय लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। रैन बसेरा कोई सामान्य भवन नहीं,बल्कि उन लोगों के लिए सहारा है,जिन्हें विपरीत परिस्थितियों में सुरक्षित आश्रय की आवश्यकता होती है। ऐसे में इस सुविधा की उपयोगिता,स्वच्छता,सुरक्षा और संचालन व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। रैन बसेरे का औचक निरीक्षण और उसे बंद करने के निर्देश इस बात का संकेत हैं कि जनहित से जुड़ी व्यवस्थाओं की अनदेखी नहीं की जा सकती। सार्वजनिक धन और संसाधनों से तैयार की गई सुविधाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए नियमित निगरानी,जिम्मेदार संचालन और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। महापौर ने बताया कि रैन बसेरे का जल्द नए सिरे से निर्माण कराया जाएगा और इसके बाद व्यवस्थित ढंग से संचालन शुरू किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रैन बसेरे में आने वाले जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित वातावरण और सम्मानजनक आश्रय मिल सके। नए स्वरूप में रैन बसेरे को तैयार करने के साथ उसके संचालन एवं रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होगी,ताकि भविष्य में इस प्रकार की अव्यवस्थाएं दोबारा सामने न आएं। इसके लिए स्पष्ट संचालन व्यवस्था,नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय करना महत्वपूर्ण होगा। ठंड के मौसम में रैन बसेरे की उपयोगिता और बढ़ जाती है पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण श्रीनगर में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग विभिन्न कार्यों,उपचार,शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए पहुंचते हैं। कई बार आर्थिक तंगी,परिवहन की अनुपलब्धता अथवा अन्य मजबूरियों के चलते लोगों को रात बिताने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं मिल पाता। ऐसी परिस्थितियों में रैन बसेरा उनके लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। सर्दियों के मौसम में इसकी आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। ऐसे में रैन बसेरे को बंद करने के बाद उसके पुनर्निर्माण और संचालन की प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी करना जरूरी होगा,ताकि जरूरतमंद लोगों को लंबे समय तक इस सुविधा से वंचित न रहना पड़े। महापौर आरती भण्डारी के औचक निरीक्षण ने रैन बसेरे की व्यवस्थाओं को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। अब शहरवासियों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नए सिरे से निर्माण और संचालन की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है तथा भविष्य में इस सुविधा की निगरानी किस प्रकार की जाती है। जनसुविधाओं की सार्थकता केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होती,बल्कि उनका सही उद्देश्य के अनुरूप संचालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। गरीबों और बेसहारा लोगों के लिए बना रैन बसेरा वास्तव में उनके लिए सुरक्षित आश्रय बने,इसके लिए प्रशासनिक सतर्कता,पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। महापौर के सख्त निर्देशों के बाद अब उम्मीद है कि रैन बसेरे को व्यवस्थित स्वरूप देकर वास्तविक जरूरतमंदों के लिए उपयोगी बनाया जाएगा। आखिरकार,जनहित में बनी सुविधा का लाभ जनहित में ही मिलना चाहिए-यही सुशासन और जनसेवा की वास्तविक कसौटी है।