श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्यकर्मी को मिल रहा मनोसामाजिक सहायता का विशेष प्रशिक्षण

हिमालय टाइम्सगबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में जहां प्राकृतिक आपदाएं समय-समय पर जनजीवन को झकझोर देती हैं,वहीं अब राज्य स्वास्थ्य विभाग ने आपदा प्रबंधन के मनोवैज्ञानिक और मानवीय पक्ष को

📘 इन्हें भी पढ़ें

हिमालय टाइम्स
गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में जहां प्राकृतिक आपदाएं समय-समय पर जनजीवन को झकझोर देती हैं,वहीं अब राज्य स्वास्थ्य विभाग ने आपदा प्रबंधन के मनोवैज्ञानिक और मानवीय पक्ष को सशक्त बनाने की दिशा में सराहनीय पहल की है। इसी क्रम में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में पांच दिवसीय मनोसामाजिक सहायता प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है,जो राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण,उत्तराखंड द्वारा भारत सरकार एवं निमहांस (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज),बेंगलुरु के सहयोग से संचालित हो रही है। कार्यशाला का शुभारंभ कॉलेज के प्राचार्य प्रो.आशुतोष सयाना ने किया। उन्होंने कहा कि आपदा केवल भौतिक विनाश नहीं लाती,बल्कि यह लोगों के मनोबल और मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई तक प्रभावित करती है। ऐसे समय में मनोसामाजिक सहायता ही वह अदृश्य शक्ति है,जो समाज को फिर से खड़ा करती है। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रशिक्षण से स्वास्थ्यकर्मी आपदा की स्थिति में मानसिक प्राथमिक सहायता (Psychological First Aid) देने में सक्षम होंगे और समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ा पाएंगे। कार्यशाला में निमहांस बेंगलुरु से आए विशेषज्ञ डॉ.संजीव कुमार मणिकप्पा (एसोसिएट प्रोफेसर),डॉ.के.सुरेश (परामर्शदाता),डॉ.अनिल (परामर्शदाता) तथा राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण,उत्तराखंड के डॉ.पंकज सिंह (सहायक निदेशक) प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि आपदा के दौरान तनाव प्रबंधन,सामुदायिक सहयोग,आत्महत्या की रोकथाम और मानसिक प्राथमिक सहायता जैसे तत्व अत्यंत आवश्यक हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि यह पहल स्वास्थ्यकर्मियों को न केवल आपदा के बाद सहायता देने में सक्षम बनाएगी,बल्कि समुदाय स्तर पर मानसिक मजबूती और संवेदनशीलता का वातावरण भी तैयार करेगी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत अगले एक माह में लगभग 100 स्वास्थ्यकर्मियों जिनमें मनोचिकित्सक,चिकित्सा अधिकारी,सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी,काउंसलर और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल,प्रशिक्षित का उद्देश्य यह है कि भविष्य में किसी भी आपदा की स्थिति में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी साइकोसोशल केयर प्रदान कर सकें और प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास में मानसिक रूप से भी सहारा बनें। तीन चरणों में चल रहा है राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम-पहला चरण-जनपद देहरादून में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। दूसरा चरण-वर्तमान में श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में आयोजित है। तीसरा और अंतिम चरण अगले माह आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने आपदा परिस्थितियों में अपने कार्यानुभव साझा किए। उनका कहना था कि ऐसी कार्यशालाएं न केवल ज्ञानवर्धक हैं,बल्कि मानसिक दृढ़ता और आपातकालीन तैयारी को भी मजबूत करती हैं। इस अवसर पर डॉ.अंकित,डॉ.राशिद,अरविंद नेगी,मनमोहन सिंह,कमला,रेखा,संगीता,सीमा सहित बड़ी संख्या में डॉक्टर,काउंसलर और पैरामेडिकल स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। यह प्रशिक्षण कार्यशाला न केवल आपदा प्रबंधन के तकनीकी पहलुओं को सुदृढ़ कर रही है,बल्कि यह मानवता के पुनर्निर्माण और मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय लिख रही है। राज्य स्वास्थ्य विभाग की यह पहल भविष्य में उत्तराखंड को एक मानव-केंद्रित और मानसिक रूप से सशक्त आपदा प्रबंधन मॉडल की ओर अग्रसर करेगी। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में मनोसामाजिक सहायता प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मार्गदर्शन देते निमहांस बेंगलुरु के विशेषज्ञ।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...