श्री कटकेश्वर महादेव मंदिर में महास्वामी शंकर भारती का दिव्य आगमन-जलाभिषेक कर विश्वशांति एवं लोककल्याण की कामना,सनातन संस्कृति के संरक्षण का दिया संदेश

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक,धार्मिक एवं आध्यात्मिक नगरी श्रीनगर गढ़वाल स्थित प्राचीन श्री कटकेश्वर महादेव मंदिर में बुधवार 21 अक्टूबर 2026 को परम पूज्य श्री श्री शंकर भारती

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक,धार्मिक एवं आध्यात्मिक नगरी श्रीनगर गढ़वाल स्थित प्राचीन श्री कटकेश्वर महादेव मंदिर में बुधवार 21 अक्टूबर 2026 को परम पूज्य श्री श्री शंकर भारती महास्वामी का दिव्य आगमन हुआ। उनके पावन आगमन से मंदिर परिसर का वातावरण श्रद्धा,भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा। इस अवसर पर महास्वामी ने भगवान श्री कटकेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा समस्त विश्व के सुख,शांति,आरोग्य,सद्भाव और लोककल्याण की मंगलकामना की। श्री श्री शंकर भारती महास्वामी पीठाधीश्वर,यदथोर योगानंदेश्वर सरस्वती मठ के.आर.नगर जिला मैसूर कर्नाटक के श्री कटकेश्वर महादेव मंदिर पहुंचने पर मंदिर से जुड़े संत-महंतों,शिवभक्तों एवं श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत और आत्मीय अभिनंदन किया। महास्वामी के सानिध्य में संपन्न पूजन-अर्चन एवं आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की। उनके श्रीमुख से प्राप्त आशीर्वचनों ने उपस्थित भक्तों को आध्यात्मिक प्रेरणा और आत्मिक शांति का अनुभव कराया। भगवान शिव की आराधना को समर्पित इस पावन अवसर पर महास्वामी शंकर भारती जी ने श्री कटकेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर विधिवत पूजन किया। शिव आराधना के माध्यम से उन्होंने सर्वजन के कल्याण, समाज में सद्भाव,मानव जीवन में सुख-समृद्धि तथा संपूर्ण विश्व में शांति और सौहार्द की मंगलकामना की। सनातन परंपरा में भगवान शिव को कल्याण,करुणा,तपस्या और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना गया है। ऐसे में प्राचीन शिवधाम में महास्वामी जी का आगमन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्त्व का अवसर रहा। मंदिर परिसर में उपस्थित भक्तों ने भगवान श्री कटकेश्वर महादेव के दर्शन किए और महास्वामी जी का आशीर्वाद प्राप्त कर स्वयं को सौभाग्यशाली अनुभव किया। उल्लेखनीय है कि परम पूज्य महास्वामी शंकर भारती इन दिनों शंकराचार्य परंपरा से जुड़े मठ-मंदिरों के भ्रमण पर हैं। इस आध्यात्मिक यात्रा का प्रमुख उद्देश्य प्राचीन मठ-मंदिरों के इतिहास,धार्मिक महत्त्व,आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का संकलन करना तथा सनातन धर्म की समृद्ध परंपराओं को जनमानस तक पहुंचाना है। भारतीय संस्कृति की आत्मा माने जाने वाले मठ-मंदिर केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं हैं,बल्कि वे सदियों से आध्यात्मिक ज्ञान,दर्शन,संस्कार,सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक निरंतरता के संवाहक भी रहे हैं। इन प्राचीन धार्मिक स्थलों की परंपराओं को संरक्षित करना और उनकी ऐतिहासिक महत्ता को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना समय की महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है। महास्वामी जी की यह यात्रा इसी दिशा में एक प्रेरणादायी प्रयास के रूप में देखी जा रही है। वे अपनी यात्रा के माध्यम से लोगों को सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों,भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं तथा आध्यात्मिक जीवन मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा दे रहे हैं। विशेष रूप से युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पहचानने,धार्मिक विरासत का सम्मान करने और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं को जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया जा रहा है। भारतीय सनातन परंपरा में संत-महात्माओं का सानिध्य सदैव ज्ञान,विवेक,सदाचार और आत्मिक उन्नति का माध्यम रहा है। संतों के विचार मनुष्य को केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं जोड़ते,बल्कि जीवन में सेवा,करुणा,संयम,परोपकार और मानवता जैसे मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा भी देते हैं। श्री कटकेश्वर महादेव मंदिर में महास्वामी का आगमन इसी आध्यात्मिक परंपरा की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी रहा। उनके स्वागत-अभिनंदन और आशीर्वचन प्राप्त करने के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस अवसर को अपने लिए गौरव और सौभाग्य का क्षण बताया। मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा तथा भगवान शिव के प्रति भक्तों की आस्था और अधिक प्रगाढ़ दिखाई दी। महास्वामी के पावन आगमन,पूजन एवं आरती के अवसर पर महंत महेश गिरि,पंडित बिजेंद्र बलूनी,दीप चंद्र गिरि,विनीत गिरि,अक्षत गिरि,शिवभक्त भोपाल सिंह चौधरी,नगर निगम श्रीनगर के सभासद आशीष नेगी,मनोज भट्ट,संस्कृत विद्यालय श्रीनगर के छात्र,सरोजिनी प्रतिमा गोदियाल,उषा चौधरी,शालिनी नेगी,अंकित,संजय,उषा,गीता सहित अनेक शिवभक्त एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने महास्वामी का स्वागत कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और भगवान श्री कटकेश्वर महादेव से समस्त मानव समाज के कल्याण की प्रार्थना की। देवभूमि उत्तराखंड की पहचान यहां स्थित प्राचीन मंदिरों,सिद्धपीठों,तपस्थलों और समृद्ध धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है। श्रीनगर गढ़वाल भी अपनी ऐतिहासिक,सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के लिए विशेष स्थान रखता है। ऐसे में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले संत-महात्माओं का यहां आगमन धार्मिक परंपराओं के परस्पर जुड़ाव और आध्यात्मिक संवाद को नई ऊर्जा प्रदान करता है। श्री कटकेश्वर महादेव मंदिर में परम पूज्य श्री श्री शंकर भारती महास्वामी का आगमन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय आध्यात्मिक अवसर रहा। यह अवसर सनातन संस्कृति की निरंतरता,संत परंपरा के सम्मान और भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण के संकल्प को भी सुदृढ़ करता है। अंत में समस्त श्रद्धालुओं ने भगवान श्री कटकेश्वर महादेव से प्रार्थना की कि परम पूज्य महास्वामी जी के पावन सानिध्य और आध्यात्मिक प्रेरणा से समाज में प्रेम,सद्भाव,सेवा और भाईचारे की भावना मजबूत हो तथा संपूर्ण विश्व में सुख,शांति,समृद्धि और लोककल्याण का मार्ग प्रशस्त हो।

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