संस्कारों से संवरता पर्यावरण-शिवांश के चूड़ाकर्म पर समलौण पौधारोपण बना प्रेरणा की मिसाल

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकास खण्ड थलीसैंण की पट्टी कण्डारस्यूं के अंतर्गत ग्राम बनास में एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली,जहां परंपरा और पर्यावरण संरक्षण

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकास खण्ड थलीसैंण की पट्टी कण्डारस्यूं के अंतर्गत ग्राम बनास में एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली,जहां परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संगम नजर आया। मनोज सिंह एवं सीमा देवी के पुत्र शिवांश के चूड़ाकर्म संस्कार के पावन अवसर पर घर के आंगन में मौसमी का समलौण पौधा रोपकर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया। इस विशेष अवसर को केवल एक पारिवारिक संस्कार तक सीमित न रखते हुए,इसे सामाजिक जागरूकता के रूप में प्रस्तुत किया गया। पौधारोपण के साथ ही उसके संरक्षण की जिम्मेदारी शिवांश की माता सीमा देवी ने स्वयं ली,जो इस पहल को और अधिक सार्थक बनाती है। कार्यक्रम का संचालन गांव की समलौण सेना की सक्रिय सदस्य बीमा देवी बर्त्वाल और उर्मिला देवी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जीवन के अस्तित्व के लिए वनों का संरक्षण और वृक्षारोपण अत्यंत आवश्यक है। वृक्ष केवल पर्यावरण ही नहीं,बल्कि मानव जीवन के हर चरण से जुड़े होते हैं और अनेक प्रकार से लाभ प्रदान करते हैं। उन्होंने वर्तमान समय की चुनौतियों ग्लोबल वार्मिंग,जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण असंतुलन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन समस्याओं का मुख्य कारण मानव की प्रकृति के प्रति उदासीनता है। ऐसे में समलौण पहल एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है,जिसमें जीवन के प्रत्येक संस्कार जन्म,विवाह,चूड़ाकर्म आदि पर पौधारोपण कर पर्यावरण के प्रति भावनात्मक जुड़ाव विकसित किया जाता है। इस अवसर पर क्षेत्रवासियों से अपील की गई कि वे भी अपने पारिवारिक एवं सामाजिक आयोजनों में समलौण पौधारोपण को अपनाएं,ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और हरित भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम में गांव की समलौण सेना के सभी सदस्य,ग्रामीणजन एवं आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे। इस सराहनीय पहल के लिए परिवार की ओर से समलौण सेना को 251 रुपए की नगद राशि देकर सम्मानित किया गया। यह आयोजन एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरा,जहां एक छोटे से संस्कार ने पर्यावरण संरक्षण का बड़ा संदेश दिया-कि यदि हर परिवार एक पौधा रोपे और उसकी जिम्मेदारी निभाए,तो प्रकृति का संतुलन स्वतः ही सुदृढ़ हो सकता है।

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