समलौण से सजी शादी-नवदंपति ने पौधारोपण कर प्रकृति संग जोड़ा जीवन का नया अध्याय

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड पौड़ी अंतर्गत पट्टी कण्डारस्यूं के ग्राम पैलार में एक शादी समारोह सामाजिक,सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चेतना का अनूठा उदाहरण बनकर सामने आया। विवाह

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड पौड़ी अंतर्गत पट्टी कण्डारस्यूं के ग्राम पैलार में एक शादी समारोह सामाजिक,सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चेतना का अनूठा उदाहरण बनकर सामने आया। विवाह के पावन अवसर को केवल पारंपरिक रस्मों तक सीमित न रखते हुए नवदंपति अनूप एवं ममता ने अपने जीवन की नई शुरुआत समलौण परंपरा के तहत मौसमी का पौधा रोपकर की,जिससे पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश प्रसारित हुआ। नवदंपति द्वारा घर के आंगन में पौधरोपण कर इस शुभ अवसर को यादगार बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया गया। इस पौधे के संरक्षण की जिम्मेदारी परिवार की मुखिया सावित्री देवी ने अपने हाथों में ली,जो इस पहल को भावनात्मक जुड़ाव के साथ आगे बढ़ाने का प्रतीक है। कार्यक्रम का संचालन गांव की समलौण सेना की नायिका सतेश्वरी देवी द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वृक्षों का मानव जीवन से संबंध जन्म से लेकर मृत्यु तक जुड़ा हुआ है। वृक्ष न केवल हमें प्रत्यक्ष रूप से फल,फूल और छाया प्रदान करते हैं,बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से जीवनदायिनी ऑक्सीजन देकर हमारे अस्तित्व को बनाए रखते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए समलौण जैसी पहल अत्यंत आवश्यक है,जिसमें हर शुभ अवसर-जन्म,विवाह,नामकरण या अन्य संस्कारों पर पौधरोपण कर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि समलौण पहल अब केवल एक परंपरा नहीं बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा एक जन आंदोलन बन चुका है,जिसमें लोग भावनात्मक रूप से पौधों का संरक्षण भी सुनिश्चित कर रहे हैं। सतेश्वरी देवी ने क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे प्रत्येक संस्कार पर पौधरोपण को अपनाएं और वनों को आग जैसी आपदाओं से बचाने में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। इस अवसर पर समलौण सेना की सदस्य लक्ष्मी देवी,पूजा देवी,अनीता देवी सहित अन्य ग्रामीणों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सामूहिक सहभागिता का रूप प्रदान किया। परिवार की ओर से इस पुण्य कार्य के प्रति आभार व्यक्त करते हुए समलौण सेना को 251 रुपये की सम्मान राशि भी भेंट की गई। यह आयोजन न केवल एक पारिवारिक खुशी का प्रतीक बना,बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गया कि यदि परंपराओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा जाए,तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

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