हिमालय टाइम्स
गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर एवं आसपास के क्षेत्रों में संचालित कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) उपभोक्ताओं के लिए वरदान साबित होने चाहिए थे,लेकिन शिकायतें मिल रही हैं कि इन केंद्रों के संचालक आम नागरिकों की मजबूरी का फायदा उठाकर सरकारी निर्धारित शुल्क से कहीं अधिक धनराशि वसूल रहे हैं। इस गंभीर मुद्दे को सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता कुशलानाथ ने जिलाधिकारी पौड़ी के संज्ञान में लाते हुए जनहित में ठोस कार्रवाई की मांग की है। नागरिकों की मजबूरी का हो रहा शोषण-वर्तमान समय में राशन कार्ड भौतिक सत्यापन के कारण प्रत्येक राशन कार्ड धारक को आय प्रमाण पत्र बनवाना अनिवार्य हो गया है। इसके लिए नागरिकों को सीएससी सेंटर पर जाकर ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड करने के बाद पंजीकरण कराना होता है। नियमों के अनुसार मात्र रुपए 40 की सरकारी फीस निर्धारित है। लेकिन वास्तविकता यह है कि कई सेंटर प्रबंधक लोगों से कई गुना ज्यादा शुल्क वसूल रहे हैं। कुशलानाथ का कहना है कि यह न केवल जनता के साथ अन्याय है बल्कि शासन-प्रशासन की मंशा के विपरीत भी है। कुशलानाथ ने अपने ज्ञापन में जिलाधिकारी से कुछ अहम कदम उठाने का अनुरोध किया है। सीएससी सेंटरों का भौतिक सत्यापन जिले,नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित सभी सीएससी सेंटरों की जांच कर वैध और अवैध सेंटरों की सूची सार्वजनिक की जाए। रेट लिस्ट जारी व प्रदर्शित हो जिला प्रशासन द्वारा यह तय किया जाए कि रुपए 40 सरकारी फीस के अलावा किसी प्रमाण पत्र के लिए अधिकतम कितना अतिरिक्त शुल्क लिया जा सकता है। यह रेट लिस्ट प्रत्येक सीएससी सेंटर पर अनिवार्य रूप से चस्पा हो। निगरानी व कार्रवाई–नगर निगम,नगर पालिका,नगर पंचायत व विकासखंड कार्यालयों के माध्यम से सीएससी सेंटरों की नियमित निगरानी हो और नियमों के उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई की जाए। आम जनता को मिले राहत-ज्ञापन में कहा गया है कि सीएससी सेंटर नागरिकों की सुविधा के लिए बनाए गए थे, न कि उन्हें लूटने के लिए। यदि तय रेट लिस्ट प्रत्येक केंद्र पर प्रदर्शित होगी तो उपभोक्ता जागरूक होंगे और मनमानी वसूली पर अंकुश लगेगा। कुशलानाथ ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि इस विषय पर तत्काल आदेश जारी कर प्रशासनिक अधिकारियों को जागरूकता और सख्त निगरानी के लिए निर्देशित किया जाए,ताकि आम जनता को राहत मिल सके।