
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। प्रदेश के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर ने एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल की है। स्नातक स्तर पर प्रवेश हेतु कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी-यूजी) 2026 को लेकर विश्वविद्यालय द्वारा विशेष जन-जागरूकता अभियान शुरू किया गया है,जिसका उद्देश्य दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को प्रवेश प्रक्रिया की समुचित जानकारी देकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है। इस अभियान के अंतर्गत अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओ.पी.गुसाईं के निर्देशन में विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों की चार विशेष टीमें गठित की गई हैं,जो 20 से 24 जनवरी 2026 तक गढ़वाल मंडल के रुद्रप्रयाग एवं चमोली जनपदों के दूरस्थ राजकीय एवं निजी इंटरमीडिएट कॉलेजों का भ्रमण कर कक्षा 12 वीं के छात्र-छात्राओं को सीयूईटी-यूजी से जुड़ी बारीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करेंगी। प्रधानाचार्यों के साथ संवाद,प्रवेश रणनीति पर मंथन इसी क्रम में विकासखंड खिर्सु एवं कीर्तिनगर के अंतर्गत आने वाले इंटरमीडिएट कॉलेजों के प्रधानाचार्यों के साथ विश्वविद्यालय स्तर पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें शैक्षणिक सत्र 2026-27 में स्नातक प्रवेश हेतु सीयूईटी-यूजी 2026 की प्रक्रिया,विषय चयन,पात्रता और विश्वविद्यालय द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों पर विस्तृत चर्चा की गई। सीयूईटी से पारदर्शी और समान अवसर प्रो.ओ.पी.गुसाईं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओ.पी.गुसाईं ने कहा कि उच्च शिक्षा में पारदर्शिता,समानता और एकरूपता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा सीयूईटी प्रणाली लागू की गई है। सीयूईटी-यूजी 2026 के माध्यम से देश के केंद्रीय,राज्य,निजी एवं डीम्ड विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश मिलेगा। यह परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित की जा रही है। उन्होंने बताया कि सीयूईटी-यूजी 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया 3 जनवरी से 30 जनवरी 2026 तक एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से पूरी तरह ऑनलाइन संचालित होगी। परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी और विषय चयन विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित विषय मैपिंग के अनुरूप किया जाएगा। बैठक को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि सीयूईटी केवल एक प्रवेश परीक्षा नहीं,बल्कि छात्रों के लिए देशभर के विश्वविद्यालयों के द्वार खोलने वाला मंच है। जब कोई अभ्यर्थी सीयूईटी के लिए आवेदन करता है,तो उसे कई विश्वविद्यालयों और पाठ्यक्रमों की जानकारी एक साथ मिलती है। सफल होने पर छात्र अपनी रुचि,विषय चयन और पारिवारिक परिस्थिति के अनुसार देश के किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रवेश ले सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सीयूईटी लागू होने से छात्र-छात्राओं को अलग-अलग विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं से मुक्ति मिली है और बीए,बीएससी,बीकॉम सहित सभी स्नातक कार्यक्रमों में चयन अब एक ही राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा से संभव हो गया है। सही विषय चयन अनिवार्य-समर्थ पोर्टल समन्वयक डॉ.प्रीतम सिंह नेगी समन्वयक समर्थ ईआरपी पोर्टल ने बताया कि गढ़वाल विश्वविद्यालय के समस्त परिसरों एवं संबद्ध महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों को सीयूईटी-यूजी में सही विषयों का चयन करना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण कर विश्वविद्यालय द्वारा जारी विषय मैपिंग और पात्रता मानदंडों का सावधानीपूर्वक अध्ययन जरूरी है। प्रो.प्रशान्त कण्डारी समन्वयक नई शिक्षा नीति 2020 ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत उच्च शिक्षा को लचीला,बहु-विकल्पीय और कौशल-आधारित बनाया गया है। बहु-प्रवेश एवं बहु-निकास प्रणाली से छात्र किसी भी चरण पर शिक्षा रोकने या पुनः प्रारंभ करने में सक्षम होंगे। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था में यूजी सर्टिफिकेट,डिप्लोमा,स्नातक,ऑनर्स,ऑनर्स विद रिसर्च,परास्नातक और पीएचडी तक स्पष्ट शैक्षणिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं,जिससे ड्रॉपआउट दर कम होने और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। व्यापक सहभागिता,सफल अभियान की नींव बैठक में खिर्सु एवं कीर्तिनगर क्षेत्र के लगभग 40 इंटरमीडिएट कॉलेजों के प्रधानाचार्यों ने सहभागिता की। इस अवसर पर प्रो.एन.एस.पंवार (वित्तअधिकारी),प्रो.एम.एम.सेमवाल,प्रो.एम.एस.पंवार,डॉ.विजयकांत पुरोहित,आशुतोष बहुगुणा,सूर्य प्रकाश सिंह बादल सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे। सीयूईटी जागरूकता अभियान के लिए गठित टीमों में डॉ.सुरेन्द्र सिंह बिष्ट,डॉ.गंभीर सिंह कठैत,डॉ.वरुण बर्थवाल,डॉ.कपिल पंवार,डॉ.अनूप सेमवाल,डॉ.बालकृष्ण बधानी सहित अन्य संकाय सदस्य शामिल हैं। यह अभियान गढ़वाल विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है,जिसमें हर विद्यार्थी तक सही जानकारी,सही समय पर और सही माध्यम से पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है ताकि उच्च शिक्षा का सपना किसी भी छात्र के लिए अधूरा न रहे।