हिन्दी साहित्य साधना को मिला गौरव-प्रो.दिनेश चमोला शैलेश को मिला श्री रघुनाथ कीर्ति हिन्दी सेवा सम्मान

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर द्वारा इस वर्ष का श्री रघुनाथ कीर्ति हिंदी सेवा सम्मान उत्तराखंड के वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रख्यात कवि-आलोचक प्रो.दिनेश चमोला शैलेश

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर द्वारा इस वर्ष का श्री रघुनाथ कीर्ति हिंदी सेवा सम्मान उत्तराखंड के वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रख्यात कवि-आलोचक प्रो.दिनेश चमोला शैलेश को प्रदान किया गया। हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित भव्य समारोह में यह सम्मान उन्हें सौंपा गया। समारोह का शुभारंभ प्रसिद्ध रचनाकार डॉ.भक्तदर्शन की स्मृति में आयोजित विशेष व्याख्यान से हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे प्रसिद्ध कवि धर्मेंद्र उनियाल,सह निदेशिका प्रो.चंद्रकला आर.कोंडी,हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम संयोजक डॉ.वीरेंद्र सिंह बर्त्वाल तथा सह संयोजक कु.पायल पाठक ने प्रो.चमोला को शॉल,प्रतीक चिह्न और प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। सम्मान ग्रहण करते हुए भावुक प्रो.चमोला ने कहा जिस माटी में मेरा जन्म हुआ,उसी धरती पर इतना बड़ा सम्मान पाना मेरे लिए अपार गौरव की बात है। साहित्यकार पुरस्कार की लालसा से नहीं लिखता,किंतु जब उच्च शिक्षण संस्थान रचनात्मक प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें सम्मानित करते हैं तो यह साहित्यिक साधना को नई ऊर्जा देता है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्ति का परिवेश उसके चिंतन और लेखन पर गहरा प्रभाव डालता है। सुमित्रानंदन पंत से लेकर चंद्रकुंवर बर्त्वाल तक अनेक साहित्यकारों ने पहाड़ की प्रकृति से प्रेरणा लेकर कालजयी रचनाएं दीं। ऐसे उदाहरण हमें बताते हैं कि रचनाकार का परिवेश ही उसकी रचनात्मकता को आकार देता है। मुख्य अतिथि धर्मेंद्र उनियाल ने कहा कि हिंदी की विविध विधाओं पर लगभग सौ ग्रंथों की रचना कर चुके प्रो.चमोला को यह सम्मान मिलना न केवल रघुनाथ कीर्ति परिसर की सार्थक पहल है,बल्कि हिंदी जगत के लिए भी गौरव की बात है। हिंदी पखवाड़ा संयोजक डॉ.वीरेंद्र सिंह बर्त्वाल ने जानकारी दी कि यह सम्मान वर्ष 2018 से प्रारंभ हुआ और अब तक डॉ.सुशील कोटनाला,डॉ.जयंती प्रसाद नौटियाल,प्रो.राखी उपाध्याय एवं महावीर रंवाल्टा को दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्राप्त 18 आत्मवृत्तों में से निर्णायक मंडल ने सर्वसम्मति से प्रो.चमोला को उपयुक्त पाया। इस अवसर पर ज्योतिष विभाग संयोजक डॉ.ब्रह्मानंद मिश्र ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन साहित्य विभाग के प्राध्यापक डॉ.सोमेश बहुगुणा ने किया तथा अध्यक्षता सह निदेशिका प्रो.चंद्रकला आर.कोंडी ने की। कार्यक्रम में डॉ.अरविंद सिंह गौर,डॉ.सुमिति सैनी,डॉ.रश्मिता,डॉ.सुधांशु वर्मा,डॉ.धनेश पीवी,पंकज कोटियाल सहित अनेक साहित्यकार,शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस अवसर पर पूरा परिसर हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा और उत्तराखंड की सांस्कृतिक चेतना के प्रति सम्मान और गर्व से अभिभूत दिखाई दिया।

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