हिमालय की गोद में जागी दिव्यता-श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने ही गूंजा सनातन आस्था का महासागर

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी केदारनाथ/रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय की गोद में विराजमान द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र धाम श्री केदारनाथ मंदिर के कपाट आज वैष्णव-शैव परंपराओं के संगम और वैदिक रीति-विधानों के साथ

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

केदारनाथ/रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय की गोद में विराजमान द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र धाम श्री केदारनाथ मंदिर के कपाट आज वैष्णव-शैव परंपराओं के संगम और वैदिक रीति-विधानों के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। प्रातः ठीक 8 बजे शुभ मुहूर्त में जैसे ही कपाट खुले,पूरा धाम हर-हर महादेव और जय श्री केदार के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा-मानो स्वयं देवभूमि की वादियां भी इस अलौकिक क्षण की साक्षी बन गई हों। कपाट खुलने का यह पावन अवसर केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं,बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत आत्मा का प्रतीक है। हजारों श्रद्धालु,साधु-संत,तीर्थ पुरोहित और धर्माचार्य इस दिव्य क्षण के साक्षी बने। धाम में पहली पूजा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न हुई,जो बाबा केदारनाथ के प्रति उनकी गहन आस्था को दर्शाती है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे। उन्होंने बाबा केदारनाथ के दर्शन कर प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि,शांति और उन्नति की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ धाम केवल आस्था का केंद्र ही नहीं,बल्कि भारत की प्राचीन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केदारपुरी का जो पुनर्निर्माण हुआ,वह आज भव्य और दिव्य केदारनाथ के रूप में विश्वभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। कपाट उद्घाटन के अवसर पर श्री केदारनाथ मंदिर को 51 क्विंटल से अधिक फूलों से सुसज्जित किया गया। जैसे ही कपाट खुले,हेलीकॉप्टर से की गई पुष्पवर्षा ने वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। सिख रेजीमेंट के बैंड की मधुर धुनों के बीच यह दृश्य अद्भुत और अविस्मरणीय बन गया। भगवान केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से गुप्तकाशी,फाटा और गौरीकुंड होते हुए एक दिन पूर्व ही धाम पहुंच चुकी थी। प्रातः 5 बजे से पूजा-अर्चना की प्रक्रिया प्रारंभ हुई और रावल भीमाशंकर लिंग,पुजारी टी.गंगाधर सहित वेदपाठियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गर्भगृह में विशेष अनुष्ठान संपन्न किए गए। देव आवाहन और लोककल्याण के संकल्प के साथ ठीक शुभ मुहूर्त में कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए-एक ऐसा क्षण,जिसे हर श्रद्धालु अपने जीवन की सबसे पावन स्मृति के रूप में संजोकर रखता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा को सुरक्षित,सुव्यवस्थित और सुगम बनाने के लिए किए गए व्यापक प्रबंधों का उल्लेख करते हुए सभी श्रद्धालुओं से नियमों का पालन करने की अपील की। साथ ही उन्होंने उत्तराखंडवासियों से आग्रह किया कि वे देश-विदेश से आने वाले यात्रियों के प्रति सेवा,सहयोग और अतिथि देवो भवः की भावना बनाए रखें। इस अवसर पर गीता धामी,बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी,विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल,जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत,ब्लॉक प्रमुख ऊखीमठ पंकज शुक्ला,जिलाधिकारी विशाल मिश्रा,पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि,हक-हकूकधारी,तीर्थ पुरोहितगण और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र,सनातन आस्था का प्रतीक
केदारनाथ धाम का कपाट खुलना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं,बल्कि आस्था,विश्वास,संस्कृति और सनातन परंपरा की उस निरंतर धारा का उद्घोष है,जो सदियों से भारतीय जनमानस को जोड़ती आई है। जब हिमालय की वादियों में गूंजता है हर-हर महादेव,तब केवल ध्वनि नहीं,बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है।”

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