हिमालय दिवस पर गढ़वाल विश्वविद्यालय के पौड़ी बीजीआर परिसर में गूंजा हिमालय बचाओ-भविष्य सजाओं

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल विश्वविद्यालय के बीजीआर परिसर पौड़ी में प्राकृतिक विज्ञान विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में हिमालय दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

📘 इन्हें भी पढ़ें

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल विश्वविद्यालय के बीजीआर परिसर पौड़ी में प्राकृतिक विज्ञान विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में हिमालय दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप में विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान विभाग डॉ.विक्रम सिंह नेगी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए हिमालय के महत्व और उसके संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ.नेगी ने हिमालय की जैव-विविधता,सांस्कृतिक धरोहर,हिम शिखर,नदियों और प्राकृतिक संसाधनों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिमालय केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए जीवनदायिनी धुरी है। यह क्षेत्र नदियों का उद्गम स्थल है और करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार भी। उन्होंने कहा कि अनियंत्रित पर्यावरणीय दोहन और जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयीय क्षेत्र गंभीर संकट से गुजर रहा है। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि पर्यटन,अनियंत्रित निर्माण और जंगलों की कटाई से हिमालय पर गहरा असर पड़ रहा है। डॉ.विक्रम सिंह नेगी ने छात्रों से आह्वान किया कि वे स्वयं आगे बढ़कर समाज में जागरूकता फैलाएं और हिमालय के संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा हिमालय केवल पर्वत नहीं,बल्कि हमारी संस्कृति,सभ्यता और अस्तित्व का प्रहरी है,इसलिए इसका संरक्षण हम सभी का दायित्व है। इस अवसर पर कार्यक्रम डॉ.यशवंत सिंह,प्रीति नैथानी ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए हिमालय संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमें मिलकर प्रयास करना होगा। कार्यक्रम में छात्रों ने पोस्टर प्रदर्शनी,भाषण और प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से सक्रिय भागीदारी की। विशेष आकर्षण रहा हिमालय बचाओ-भविष्य बचाओ विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी,जिसमें विद्यार्थियों ने पर्यावरण संतुलन और सतत विकास पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर छात्रों को हिमालय बचाओ प्रतिज्ञा भी दिलाई गई। इस अवसर पर एमएससी,बीएससी,एनएसएस स्वयंसेवक,छात्र-छात्राएं एवं शिक्षकगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। हिमालय बचेगा,तो भविष्य सजेगा,हिमालय है जीवन की सांस,इसे बचाना सबका विश्वास,हिमालय हमारी धरोहर है,इसका संरक्षण हमारा दायित्व है,नदी,जंगल और पहाड़-हिमालय का उपहार,इन्हें बचाना है हमारा संस्कार,हिमालय सुरक्षित-देश सुरक्षित,हरे-भरे पर्वत,स्वच्छ वातावरण,हिमालय बचाओ,प्रकृति सजाओ। हिमालय दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं,बल्कि यह संकल्प है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ,सुरक्षित और संतुलित हिमालय सौंपें।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...