
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय साहित्य एवं कला परिषद श्रीनगर द्वारा विगत वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी जरूरतमंद छात्र-छात्राओं के लिए सर्दियों की ठिठुरन में स्नेह और संवेदना की गर्माहट पहुंचाई गई। परिषद ने इस बार पौड़ी जनपद के सबसे दुर्गम विद्यालयों में शुमार राजकीय इंटर कॉलेज मौजखाल विकास खण्ड थैलीसैण का चयन कर वहां अध्ययनरत बच्चों के बीच स्कूली स्वेटर एवं गर्म टोपियों का वितरण किया। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में स्थित इस विद्यालय में परिषद द्वारा कुल 196 छात्र-छात्राओं को स्वेटर एवं ऊनी टोपियां प्रदान की गईं। जैसे ही बच्चों को गर्म वस्त्र मिले,उनके चेहरों पर उमंग और खुशी साफ झलक उठी। यह वितरण मात्र वस्त्रों का नहीं,बल्कि शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़ाने और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का जीवंत उदाहरण रहा। कार्यक्रम की अगुवाई परिषद की मुखिया प्रोफेसर उमा मैठाणी ने की। उन्होंने कहा कि पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों को छोटी-छोटी सुविधाएं भी बड़ा संबल देती हैं। परिषद का उद्देश्य साहित्य और कला के साथ-साथ समाज के कमजोर वर्गों तक सहयोग और संवेदना पहुंचाना है। इस अवसर पर परिषद के सक्रिय सदस्य कृष्णानंद मैठाणी,प्रसिद्ध रंगकर्मी विमल बहुगुणा तथा डॉ.प्रकाश चमोली की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों ने परिषद की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करते हैं और शिक्षा से जुड़े रहने के लिए बच्चों को प्रेरित करते हैं। विद्यालय के सम्मानित प्रधानाचार्य एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं ने परिषद का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दुर्गम क्षेत्र के बच्चों के लिए यह सहयोग अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायी है। उन्होंने आशा जताई कि भविष्य में भी परिषद इसी प्रकार सामाजिक सरोकारों से जुड़कर शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करती रहेगी। कार्यक्रम सादगी आत्मीयता और संवेदनशीलता के वातावरण में सम्पन्न हुआ। हिमालय साहित्य एवं कला परिषद की यह पहल न केवल जरूरतमंद बच्चों के लिए राहत बनी,बल्कि समाज के लिए भी यह संदेश छोड़ गई कि जब साहित्य,कला और संवेदना एक साथ चलते हैं,तो बदलाव की राह स्वयं बनती है।