25 अक्टूबर से हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में भूगोलविदों का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

हिमालय टाइम्सगबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग द्वारा आयोजित भारतीय भूगोलवेत्ताओं के संस्थान आईआईजी का 46 वां वार्षिक अधिवेशन एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 25 अक्टूबर से 27

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गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग द्वारा आयोजित भारतीय भूगोलवेत्ताओं के संस्थान आईआईजी का 46 वां वार्षिक अधिवेशन एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 25 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित स्वामी मनमंथन प्रेक्षागृह में प्रारंभ होगा। सम्मेलन का मुख्य विषय है-गतिशील पृथ्वी,नाजुक पर्यावरण और जलवायु सहनशील समाज की दिशा। तीन दिवसीय इस वैश्विक सम्मेलन में देश-विदेश से आए वरिष्ठ भूगोलवेत्ता,वैज्ञानिक,पर्यावरणविद्,शोधार्थी और शिक्षाविद् भू-विज्ञान,जलवायु परिवर्तन,पर्यावरण अध्ययन और सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। सम्मेलन के आयोजन से विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकादमिक प्रतिष्ठा और भी सुदृढ़ होगी। भूगोल विभागाध्यक्ष एवं सम्मेलन के संयोजक प्रोफेसर मोहन सिंह पंवार ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि सम्मेलन का शुभारंभ शनिवार को होगा। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत और विशिष्ट अतिथि के रूप में हैस्को देहरादून के संस्थापक,पर्यावरणविद् एवं पद्मश्री सम्मानित डॉ.अनिल प्रकाश जोशी शामिल होंगे। प्रो.पंवार ने बताया कि यह सम्मेलन भू-विज्ञान,पर्यावरणीय संकट,जलवायु न्याय और सतत समाज निर्माण जैसे वैश्विक मुद्दों पर सार्थक विमर्श का मंच बनेगा। सम्मेलन में पृथ्वी प्रणाली की गतिशीलता,हिमालयी पारिस्थितिक अस्थिरता,जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाओं जैसे गंभीर विषयों पर विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 30 से अधिक तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें प्रमुख विषय होंगे-गतिशील पृथ्वी प्रणाली और हिमालयी हिमनद परिवर्तन,मरुस्थलीकरण,सूखा और बाढ़ का अध्ययन,नाजुक पर्यावरण एवं पर्वतीय पारिस्थितिकियां,चरम जलवायु घटनाएं और पर्यावरणीय संकट,भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस),मशीन अधिगम (मशीन लर्निंग) और उपग्रह प्रेक्षण (रिमोट सेंसिंग) के अनुप्रयोग,जलवायु परिवर्तन और न्याय,वैश्विक नीतियां,समानता एवं सतत शासन,शहरीकरण,परिवहन भूगोल और स्मार्ट नगर विकास। इन सत्रों में विशेषज्ञ अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत करेंगे,जो नीति निर्माण और शैक्षणिक अनुसंधान दोनों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। प्रो.पंवार ने बताया कि 27 अक्टूबर को आयोजित होने वाले समापन सत्र में शैक्षणिक अनुशंसाएं और भविष्य की कार्ययोजनाएं तैयार कर भारत सरकार के नीति आयोग,उत्तराखंड राज्य सेतु आयोग तथा राज्य के विधायकों के समक्ष प्रस्तुत की जाएंगी। उद्देश्य यह है कि भौगोलिक और पर्यावरणीय संकटों से निपटने के लिए ठोस,नीति-आधारित समाधान निकाले जा सकें। सम्मेलन में हिमालयी क्षेत्र,विशेषकर उत्तराखंड की बदलती भौगोलिक पारिस्थितिकी,भूमि क्षरण,जल स्रोतों के सूखने,भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं और पारिस्थितिक संतुलन के बिगड़ने जैसे मुद्दों पर भी गंभीर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस दौरान यह भी चर्चा की जाएगी कि किस प्रकार पारंपरिक ज्ञान,स्थानीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक का समन्वय कर जलवायु सहनशील समाज का निर्माण संभव हो सकता है। इस अवसर पर प्रोफेसर महावीर सिंह नेगी,प्रो.बी.पी.नैथानी,डॉ.राकेश सैनी,डॉ.धीरज कुमार शर्मा,डॉ.नरेंद्र कुमार,डॉ.विजयकांत पुरोहित,जनसंपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा,डॉ.वी.एस.नेगी सहित अनेक शिक्षाविद् उपस्थित रहे। गढ़वाल विश्वविद्यालय का यह सम्मेलन न केवल प्रदेश में उच्च शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा देगा,बल्कि हिमालयी पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की राह को भी और अधिक स्पष्ट करेगा।

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