7 साल बाद जागी व्यवस्था-देवप्रयाग के केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में हिंदी नामपट्ट,प्रयासों की मिली सफलता

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। सात वर्षों के लंबे इंतजार,निरंतर प्रयासों और जनभावनाओं की आवाज आखिरकार रंग लाई। देवप्रयाग स्थित Central Sanskrit University के श्रीरघुनाथ कीर्ति परिसर में अब विश्वविद्यालय का नाम

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। सात वर्षों के लंबे इंतजार,निरंतर प्रयासों और जनभावनाओं की आवाज आखिरकार रंग लाई। देवप्रयाग स्थित Central Sanskrit University के श्रीरघुनाथ कीर्ति परिसर में अब विश्वविद्यालय का नाम पट्ट हिंदी भाषा में भी अंकित कर दिया गया है। यह बदलाव न केवल एक प्रशासनिक निर्णय है,बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और भाषाई सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल लंबे समय से स्थानीय जनप्रतिनिधि,विद्वान,संस्कृत एवं हिंदी प्रेमी इस बात को लेकर आवाज उठा रहे थे कि देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में भारतीय भाषाओं को उचित स्थान मिलना चाहिए। इसी क्रम में प्रख्यात आचार्य भाष्करानन्द अणथ्वाल सहित अनेक बुद्धिजीवियों और जन-प्रतिनिधियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को ज्ञापन भेजकर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इन सतत प्रयासों और जनदबाव का ही परिणाम है कि वर्षों से लंबित यह मांग अब पूरी हो सकी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह परिवर्तन केवल एक बोर्ड बदलने तक सीमित नहीं है,बल्कि यह भारतीय भाषाओं के सम्मान,स्वाभिमान और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर जो कि देवप्रयाग की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक भूमि पर स्थित है,अब हिंदी नामपट्ट के साथ और अधिक आत्मीय और जनसुलभ प्रतीत हो रहा है। इससे न केवल स्थानीय लोगों में संतोष और गर्व की भावना बढ़ी है,बल्कि आने वाले आगंतुकों के लिए भी यह स्थान अधिक सहज और समझने योग्य बन गया है। इस पहल को लेकर क्षेत्र में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोगों का मानना है कि जब जनभावनाओं को प्राथमिकता दी जाती है,तो ऐसे छोटे-छोटे बदलाव भी बड़े सामाजिक संदेश बन जाते हैं। देवप्रयाग के केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में हिंदी नामपट्ट की स्थापना यह साबित करती है कि जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर निरंतर प्रयास अंततः परिणाम देते हैं। यह पहल भाषा के सम्मान के साथ-साथ जनभावनाओं के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता का भी सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।

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