आंचल डेयरी श्रीनगर की बड़ी पहल-बायों गैस प्लांट से आत्मनिर्भर बनेगा पहाड़

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर क्षेत्र में आंचल दुग्ध उत्पादन केंद्र की ऐतिहासिक पहल अब बहुआयामी विकास की मिसाल बनकर उभर रही है। श्रीनगर आंचल डेयरी परिसर में तैयार बायो गोबर

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर क्षेत्र में आंचल दुग्ध उत्पादन केंद्र की ऐतिहासिक पहल अब बहुआयामी विकास की मिसाल बनकर उभर रही है। श्रीनगर आंचल डेयरी परिसर में तैयार बायो गोबर गैस प्लांट के इस सप्ताह शुरू होने के साथ ही क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा,रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने जा रही है। यह पहल केवल एक परियोजना नहीं बल्कि पूरे देवभूमि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के लिए परिवर्तन का आधार बनती दिख रही है। करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हेमू हरित ऊर्जा मिशन के तहत यूसीडीएफ और केडीसीएम एग्रोटेक के संयुक्त प्रयासों से साकार किया गया है। यह अपनी तरह की अनूठी पहल है,जो दुग्ध उत्पादन,ऊर्जा निर्माण और किसानों की आय बढ़ाने को एक साथ जोड़ती है। प्लांट के संचालन से प्रतिदिन लगभग तीन टन गोबर का उपयोग होगा,जिससे करीब 500 किलोग्राम बायो गैस का उत्पादन किया जाएगा। इस गैस का उपयोग आंचल डेयरी में बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा,जिससे डीजल पर निर्भरता कम होगी और खर्च में भी कमी आएगी। यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम साबित होगा। आंचल दुग्ध उत्पादन केंद्र पहले ही क्षेत्र के किसानों और पशुपालकों के लिए मजबूत सहारा बन चुका है। अब इस नई पहल से आसपास के गांवों और गोशालाओं से गोबर खरीदकर किसानों को सीधे आर्थिक लाभ दिया जाएगा। प्रति किलो के हिसाब से भुगतान होने से गोबर,जो पहले बेकार समझा जाता था,अब आय का सशक्त स्रोत बन जाएगा। इसके साथ ही प्लांट से निकलने वाला अवशेष उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में किसानों को मिलेगा,जिससे खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और रासायनिक खादों पर निर्भरता घटेगी। यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को चक्राकार रूप से मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस पूरी पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजन है। गोबर संग्रहण,प्लांट संचालन और अन्य कार्यों में स्थानीय स्तर पर अवसर बढ़ेंगे,जिससे पलायन जैसी समस्या को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी से सामाजिक सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा। आंचल डेयरी के प्रधान प्रबंधक श्रवण कुमार शर्मा के अनुसार प्लांट की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और परीक्षण सफल रहा है। सप्ताह के अंत तक इसे विधिवत रूप से शुरू कर दिया जाएगा। भविष्य में बायो गैस को घर-घर तक कनेक्शन के माध्यम से पहुंचाने की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है। कुल मिलाकर आंचल दुग्ध उत्पादन केंद्र श्रीनगर और बायो गैस प्लांट की यह संयुक्त पहल पहाड़ के विकास,स्वच्छ ऊर्जा,रोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त मॉडल बनकर सामने आई है। आने वाले समय में यह पहल न केवल श्रीनगर बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए प्रेरणा का केंद्र बनने जा रही है।

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