
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ों की गोद में बसे श्रीनगर शहर ने अब स्वच्छता और संसाधन प्रबंधन की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग लगा दी है। नगर निगम श्रीनगर द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में शुरू की गई अत्याधुनिक पहल ने न सिर्फ शहर के भविष्य की तस्वीर बदलने का संकेत दिया है,बल्कि पूरे उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के लिए एक आदर्श मॉडल बनने की दिशा भी तय कर दी है। शहर के ठोस अपशिष्ट निस्तारण एवं भूमि भरण स्थल पर 150 टन प्रतिदिन क्षमता वाली ट्रॉमल मशीन का सफल ट्रायल शुरू हो चुका है। यह सिर्फ एक मशीन का संचालन नहीं,बल्कि कूड़े को संसाधन में बदलने की सोच का सशक्त क्रियान्वयन है। कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन: अब हर कण बनेगा उपयोगी इस अत्याधुनिक प्लांट में शहर से एकत्रित कचरे को ट्रेचिंग ग्राउंड तक लाकर ट्रॉमल मशीन से गीले और सूखे कचरे का वैज्ञानिक पृथक्करण किया जाएगा। गीला कचरा रसोई अपशिष्ट,सब्जियां आदि जैविक खाद में परिवर्तित सूखा कचरा प्लास्टिक,गत्ता,थर्माकोल,कपड़ा रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया के माध्यम से न केवल कचरे का बोझ कम होगा,बल्कि उससे गमले,खिलौने और अन्य उपयोगी घरेलू उत्पाद भी तैयार किए जा सकेंगे-यानी कचरा अब समस्या नहीं अवसर बनेगा। मेयर आरती भण्डारी और नगर आयुक्त नुपुर वर्मा ने संयुक्त रूप से इस प्लांट के ट्रायल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर नगर निगम के कई अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे,जिन्होंने इस पहल को ऐतिहासिक बताया। मेयर आरती भण्डारी ने कहा यह प्लांट श्रीनगर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी और पर्यावरण संरक्षण को नई गति मिलेगी। हमारा लक्ष्य श्रीनगर को एक आदर्श और स्वच्छ शहर बनाना है। वहीं नगर आयुक्त नुपुर वर्मा ने स्पष्ट किया कि ट्रॉमल मशीन के माध्यम से कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। इससे संसाधनों का पुनः उपयोग संभव होगा और स्वच्छता अभियान को स्थायी सफलता मिलेगी। नगर निगम की इस दूरदर्शी पहल के तहत प्लांट के पूर्ण रूप से संचालित होते ही श्रीनगर पर्वतीय क्षेत्रों का पहला आधुनिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल बन जाएगा। यह पहल न केवल स्थानीय स्तर पर,बल्कि राज्यभर में स्वच्छता के नए मानक स्थापित करेगी। इस प्लांट का सबसे अहम पहलू यह है कि यह सिर्फ स्वच्छता तक सीमित नहीं है-जैविक खाद के उत्पादन से आय,सूखे कचरे की रीसाइक्लिंग से राजस्व। इस प्रकार नगर निगम को अतिरिक्त आय के स्रोत प्राप्त होंगे,जिससे शहर के विकास कार्यों को और गति मिलेगी। स्वच्छता,पर्यावरण और अर्थव्यवस्था-तीनों का संगम कुल मिलाकर श्रीनगर का यह वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट सिर्फ एक परियोजना नहीं,बल्कि एक दूरदर्शी परिवर्तन है-जहां स्वच्छता,पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में यह पहल न केवल श्रीनगर को नई पहचान देगी,बल्कि पूरे पहाड़ के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल साबित होगी।