हर संस्कार बने प्रकृति का उत्सव- चूडाकर्म पर समलौण पौधारोपण से पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक संदेश

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। जहां एक ओर आधुनिकता की दौड़ में पारंपरिक संस्कारों की चमक धूमिल होती नजर आ रही है,वहीं श्रीनगर के अलकनंदा विहार से एक ऐसी प्रेरणादायक पहल सामने

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। जहां एक ओर आधुनिकता की दौड़ में पारंपरिक संस्कारों की चमक धूमिल होती नजर आ रही है,वहीं श्रीनगर के अलकनंदा विहार से एक ऐसी प्रेरणादायक पहल सामने आई है,जिसने सामाजिक,सांस्कृतिक,धार्मिक और पर्यावरणीय चेतना का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। श्रीनगर नगर निगम क्षेत्र के अलकनंदा विहार में जे.पी.जखमोला एवं सुलोचना देवी जखमोला के पुत्र संदीप जखमोला तथा ज्योति देवी जखमोला के पुत्र श्रीयांश के चूड़ाकर्म संस्कार को एक नई दिशा देते हुए परिवारजनों ने घर के आंगन में अमरूद का समलौण पौधा रोपकर इस पावन अवसर को यादगार बना दिया। यह केवल एक पौधारोपण नहीं,बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति संरक्षण का संकल्प भी था। इस अवसर पर बालक की दादी सुलोचना देवी ने पौधे के संरक्षण की जिम्मेदारी स्वयं लेते हुए यह संदेश दिया कि जैसे परिवार अपने बच्चों का लालन-पालन करता है,उसी प्रकार वृक्षों की देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है। कार्यक्रम का संचालन समलौण आंदोलन की राज्य संयोजिका सावित्री देवी ममगांई ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज पर्यावरण असंतुलन मानव जीवन के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। बढ़ती कार्बन डाइऑक्साइड,ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन केकारण हिमालय की बर्फ तेजी से पिघल रही है,जो भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही,तो वह दिन दूर नहीं जब हिमालय बर्फहीन हो जाएगा और उससे निकलने वाली जीवनदायिनी नदियां भी समाप्त हो सकती हैं। गाड़-गधेरे,नौले और प्राकृतिक जलस्रोत सूखने की कगार पर हैं,जिससे जल संकट गहराने की आशंका है। ऐसे समय में समलौण जैसे अभियान समाज को जागरूक करने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि समलौण केवल पौधारोपण का कार्यक्रम नहीं,बल्कि एक जनआंदोलन है,जिसमें जन्म से लेकर विवाह और अन्य संस्कारों तक हर शुभ अवसर पर पौधे रोपकर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाई जा रही है। यह पहल बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का कार्य कर रही है। सावित्री देवी ममगांई ने क्षेत्रवासियों से जंगलों को आग से बचाने और उनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि धरती का श्रृंगार तभी सुरक्षित रहेगा,जब हम अपने जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए संकल्पबद्ध होंगे। इस प्रेरणादायक अवसर पर अयांश,शैलेश जखमोला,आदिति रुडोला सहित परिवारजन, रिश्तेदार और मोहल्लेवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए अनुकरणीय बताया। इस प्रकार श्रीनगर के एक छोटे से आंगन में रोपा गया यह समलौण पौधा न केवल एक परिवार की खुशी का प्रतीक बना,बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गया कि यदि हर संस्कार के साथ एक पौधा जुड़ जाए, तो आने वाला भविष्य हरियाली,संतुलन और जीवन से परिपूर्ण हो सकता है।

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