हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
टिहरी-पौखाल/श्रीनगर गढ़वाल। युवा शक्ति को आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करने की सशक्त पहल के तहत इन्दर सिंह रावत राजकीय महाविद्यालय पौखाल में आज एक दिवसीय देवभूमि उद्यमिता योजना उन्मुखीकरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। उच्च शिक्षा विभाग उत्तराखंड सरकार एवं भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम ने छात्रों के भीतर छिपे उद्यमी को जगाने का कार्य किया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर सुरेश चंद्र द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि आज के बदलते समय में युवाओं को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहिए,बल्कि उन्हें स्वयं रोजगार सृजक बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने देवभूमि उद्यमिता योजना को युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर बताते हुए इसका अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं देवभूमि उद्यमिता योजना के टिहरी गढ़वाल के परियोजना अधिकारी दिग्विजय सिंह (भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद) ने अपने प्रेरक संबोधन में विद्यार्थियों को उद्यमिता के विभिन्न आयामों से अवगत कराया। उन्होंने सरल भाषा में समझाया कि कैसे एक छोटा-सा विचार भी सही दिशा,योजना और मेहनत के बल पर एक सफल व्यवसाय में परिवर्तित हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को व्यवसाय योजना निर्माण,विपणन रणनीति,वित्तीय प्रबंधन और नवाचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया कि इस योजना के अंतर्गत छात्रों को निःशुल्क प्रशिक्षण,मार्गदर्शन शिविर,विशेष प्रशिक्षण सत्र तथा प्रारंभिक व्यवसाय स्थापित करने हेतु सहयोग प्रदान किया जाता है। उन्होंने उदाहरण के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि साधारण दिखने वाले विचार-यदि सही ढंग से विकसित किए जाएं तो वे बड़ी सफलता की कहानी बन सकते हैं। अपने संबोधन में उन्होंने उद्यमी बनने के लिए पांच मूलभूत गुणों पर विशेष जोर दिया समस्या को पहचानने की क्षमता,जोखिम उठाने का साहस,प्रभावी संचार,नवाचार की सोच और दृढ़ संकल्प। पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से छात्रों को यह भी बताया गया कि डिजिटल युग में ई-व्यापार और सामाजिक माध्यमों के जरिए कैसे अपने उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जा सकता है। महाविद्यालय के उद्यमिता योजना प्रभारी डॉ.अनुरोध प्रभाकर ने कहा कि हर छात्र में कुछ नया करने की क्षमता होती है,आवश्यकता केवल उसे सही दिशा और मार्गदर्शन देने की है। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि इससे न केवल स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे,बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होगी और समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपने अभिनव व्यावसायिक विचार भी प्रस्तुत किए। चयनित छात्रों को आगे विशेष प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देने का आश्वासन दिया गया,जिससे उनके विचारों को वास्तविक रूप दिया जा सके। अंत में डॉ.अनुरोध प्रभाकर द्वारा सभी अतिथियों,वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण डॉ.बी.आर.भद्री,डॉ.अन्धरुति शाह,डॉ.बबीत बिहान,डॉ.पुष्पा झाबा,डॉ.गोविंद कुमार,प्रकाश बिजल्वाण तथा छात्रसंघ अध्यक्ष अरुण कुमार सहित समस्त कर्मचारीगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। यह आयोजन केवल एक कार्यशाला नहीं,बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर भारत के सपने से जोड़ने वाला एक सशक्त अभियान बनकर उभरा,जिसने नौकरी चाहने वाले नहीं,बल्कि रोजगार देने वाले युवाओं की नई पीढ़ी गढ़ने का संदेश दिया।