नेग पर फैसले से भड़का किन्नर समाज-परंपरा और पहचान की रक्षा को तेज हुआ आंदोलन-पूजा माई का बड़ा बयान

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। उच्च न्यायालय के हालिया फैसले के बाद किन्नर समाज में असंतोष की लहर तेज हो गई है। सदियों पुरानी परंपराओं और सामाजिक मान्यताओं से जुड़े नेग को

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। उच्च न्यायालय के हालिया फैसले के बाद किन्नर समाज में असंतोष की लहर तेज हो गई है। सदियों पुरानी परंपराओं और सामाजिक मान्यताओं से जुड़े नेग को लेकर उठे सवालों के बीच समुदाय ने अपने अस्तित्व,सम्मान और सांस्कृतिक पहचान पर संकट की बात कही है। विश्व हिंदू महासंघ धर्माचार्य प्रकोष्ठ की प्रदेश उपाध्यक्ष (दिल्ली) एवं किन्नर अखाड़े की श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पूजा माई ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायालय में समाज की ओर से प्रभावी और सशक्त पैरवी नहीं हो सकी,जिसके चलते उनका पक्ष पूरी मजबूती से सामने नहीं आ पाया। उनका मानना है कि यदि समाज की वास्तविक परंपराओं और मान्यताओं को उचित रूप में रखा जाता,तो स्थिति भिन्न हो सकती थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किन्नर समाज वसूली नहीं करता,बल्कि जन्म,विवाह जैसे शुभ अवसरों पर परंपरागत रूप से नेग प्राप्त करता है,जो भारतीय समाज की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। यह परंपरा आस्था,आशीर्वाद और सामाजिक संबंधों की प्रतीक रही है,जिसे गलत रूप में प्रस्तुत करना पूरे समुदाय के साथ अन्याय है। महामंडलेश्वर पूजा माई ने यह भी स्वीकार किया कि हर समाज की तरह किन्नर समुदाय में भी कुछ असामाजिक तत्व हो सकते हैं,लेकिन उनके आधार पर पूरे समाज को कठघरे में खड़ा करना न्यायोचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किन्नर समाज का इतिहास अत्यंत प्राचीन है और धार्मिक ग्रंथों में भी उनका उल्लेख सम्मान और गरिमा के साथ मिलता है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान निर्णय से न केवल उनकी परंपराओं को ठेस पहुंची है,बल्कि उनके सामाजिक अस्तित्व पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है। ऐसे में किन्नर समाज इस निर्णय को उच्च अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है,ताकि अपनी परंपराओं और अधिकारों की रक्षा की जा सके। साथ ही उन्होंने आम जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि किन्नर समाज के प्रति सम्मान और सहयोग का भाव बनाए रखें। यह समुदाय आज भी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ेपन से जूझ रहा है,ऐसे में समाज की सकारात्मक सोच और समर्थन ही उनके लिए संबल बन सकता है। यह मामला अब केवल नेग तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि यह किन्नर समाज की पहचान,परंपरा और सम्मान की रक्षा की एक बड़ी लड़ाई के रूप में उभरता नजर आ रहा है।

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