
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में वंदे मातरम् राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष के स्मरणोत्सव के अंतर्गत भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में आयोजित प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के 30 से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता का विषय राष्ट्रीय गीत की संकल्पना एवं राष्ट्रीय चेतना में वंदे मातरम् की भूमिका रखा गया। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक,सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका और देशवासियों में राष्ट्रीय चेतना जागृत करने में इसके योगदान को रेखांकित किया। विद्यार्थियों ने अपने भाषणों के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया कि वंदे मातरम् केवल एक राष्ट्रीय गीत नहीं,बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष और राष्ट्रभावना से जुड़ी एक सशक्त ऐतिहासिक अभिव्यक्ति है। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ.विश्वेश वाग्मी ने निर्णायक मंडल का स्वागत करते हुए प्रतियोगिता की रूपरेखा और विषय की गंभीरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को विषय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझते हुए अपने विचारों को प्रभावी,तार्किक एवं तथ्यपरक ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ.अमरजीत परिहार,बीएड विभाग,डॉ.अनूप सेमवाल,हिंदी विभाग तथा डॉ.सविता भण्डारी,अंग्रेजी विभाग शामिल रहे। निर्णायकों ने प्रतिभागियों के भाषण की विषय-वस्तु,प्रस्तुतीकरण,भाषा,तर्क एवं विषय की समझ सहित विभिन्न पक्षों के आधार पर मूल्यांकन किया। इस अवसर पर डॉ.नितीश बौंठियाल ने प्रतिभागियों को प्रतियोगिता से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। उन्होंने विद्यार्थियों से विषय की ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय पृष्ठभूमि को गंभीरता से समझते हुए अपने विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का आह्वान किया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया। प्रतिभागियों ने वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व,भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से इसके गहरे संबंध तथा देश में राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में इसकी भूमिका पर विस्तार से अपने विचार रखे। कई प्रतिभागियों ने इसे भारतीय समाज में देशभक्ति,एकता और राष्ट्रभावना को मजबूती प्रदान करने वाली महत्वपूर्ण प्रेरणाशक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ.नरेश कुमार,डॉ.प्रीति,डॉ.कपिल पंवार सहित संस्कृत विभाग के शोधार्थियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विश्वविद्यालय में आयोजित इस प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को देश के राष्ट्रीय आंदोलन,सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय प्रतीकों के महत्व को समझने तथा अपने विचारों को सार्वजनिक मंच पर अभिव्यक्त करने का अवसर मिला। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम,राष्ट्रीय चेतना,सांस्कृतिक गौरव और देश की ऐतिहासिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वंदे मातरम् के 150 वर्ष के स्मरणोत्सव के तहत आयोजित यह आयोजन विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के बीच राष्ट्रीय भावना को जागृत करने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में सामने आया।