श्रीनगर में जुटेंगे देशभर के जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ,मानव-समाज और पर्यावरण के बेहतर भविष्य की दिशा तय करेगा 29 वां राष्ट्रीय सम्मेलन

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक,धार्मिक एवं आध्यात्मिक नगरी श्रीनगर में जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में शोध,नवाचार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की नई संभावनाओं को लेकर देशभर के विशेषज्ञ एक

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक,धार्मिक एवं आध्यात्मिक नगरी श्रीनगर में जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में शोध,नवाचार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की नई संभावनाओं को लेकर देशभर के विशेषज्ञ एक मंच पर जुट रहे हैं। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय श्रीनगर में आयोजित होने वाला उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड राज्य शाखा का 29 वां वार्षिक भारतीय निवारक एवं सामाजिक चिकित्सा संघ सम्मेलन (आईएपीएसएम यूपी-यूके कॉन-2026) मानव,समाज और पर्यावरण के बेहतर भविष्य की दिशा में मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है। सम्मेलन के शुभारंभ से पूर्व गुरुवार को चिकित्सा महाविद्यालय में पूर्व-सम्मेलन कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें देश के विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से पहुंचे विशेषज्ञों ने अपने अनुभव,शोध संबंधी जानकारियां और नवीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा किए। कार्यशाला के माध्यम से 100 स्नातकोत्तर चिकित्सकों को आधुनिक शोध पद्धतियों और अनुसंधान की नई तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। शोध की आधुनिक तकनीकों से परिचित हुए 100 चिकित्सक कार्यशाला में गुणात्मक विश्लेषण,विभिन्न शोधों के निष्कर्षों के समेकित विश्लेषण तथा जैव-चिकित्सा अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। इसका उद्देश्य युवा चिकित्सकों को गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जनस्वास्थ्य की चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए सक्षम बनाना रहा। प्रशिक्षण देने वाले विशेषज्ञों में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान,नागपुर के प्रोफेसर डॉ.प्रदीप देशमुख एवं प्रोफेसर डॉ.योगेश बहुरूपिया,अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान,रायबरेली के प्रोफेसर डॉ.भोलानाथ,रिम्स रांची के प्रोफेसर डॉ.अनित कुजुर,पुडुचेरी चिकित्सा महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ.अमोल डोंगरे तथा कर्मचारी राज्य बीमा संस्थान,रांची के प्रोफेसर डॉ.रतनेश सिन्हा शामिल रहे। सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ शुक्रवार को दोपहर 12 बजे प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल तथा शिक्षा एवं सहकारिता मंत्री डॉ.धन सिंह रावत करेंगे। सम्मेलन में जनस्वास्थ्य से जुड़े समसामयिक विषयों,नवीन वैज्ञानिक अनुसंधानों,स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार तथा समाज और पर्यावरण से संबंधित स्वास्थ्य चुनौतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से आए विशेषज्ञों के अनुभव और शोध निष्कर्ष स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने,जनस्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान खोजने तथा भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों को बेहतर दिशा देने में सहायक होंगे। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के बाद दोपहर एक बजे से चिकित्सा महाविद्यालय एवं बेस चिकित्सालय परिसर में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और उद्घाटन प्रस्तावित है। इनमें 245.54 लाख रुपये की लागत से निर्मित 15 बिस्तरों वाले आवागमनकालीन छात्रावास,150 लाख रुपये की लागत से स्थापित कौशल प्रशिक्षण प्रयोगशाला के उपकरणों एवं कृत्रिम प्रशिक्षण पुतलों का लोकार्पण शामिल है। इसके अतिरिक्त 947.85 लाख रुपये की लागत से बनने वाले आठ पांच-सीटर प्रकार-5 आवासों का उद्घाटन भी प्रस्तावित कार्यक्रम में शामिल है। इन सुविधाओं से चिकित्सा महाविद्यालय के आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलने तथा चिकित्सकों और विद्यार्थियों के प्रशिक्षण एवं आवास संबंधी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में श्रीनगर के विधायक की भी उपस्थिति प्रस्तावित है। सम्मेलन की आयोजन अध्यक्ष डॉ.जानकी बर्त्वाल और आयोजन सचिव डॉ.सुरेंद्र सिंह ने विभिन्न अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों,चिकित्सा महाविद्यालयों तथा देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से पहुंचे प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक सहयोग से श्रीनगर में आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन क्षेत्र की पहचान को व्यापक स्तर पर मजबूत करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन में साझा की जाने वाली नवीन जानकारियां,शोध निष्कर्ष,आंकड़े और व्यावहारिक समाधान जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्यशाला के दौरान स्नातकोत्तर चिकित्सकों को शोध की बारीकियों,आधुनिक विश्लेषण तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों से परिचित कराया गया। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि गुणवत्तापूर्ण शोध के माध्यम से ही समाज की वास्तविक स्वास्थ्य समस्याओं को समझकर उनके प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकते हैं। इस अवसर पर चिकित्सा महाविद्यालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.ए.एन.पांडेय,डॉ.भोलानाथ,डॉ.सत्येंद्र यादव सहित विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य उपस्थित रहे। श्रीनगर गढ़वाल में आयोजित यह सम्मेलन चिकित्सा शिक्षा,वैज्ञानिक अनुसंधान और जनस्वास्थ्य के बीच समन्वय स्थापित करने का महत्वपूर्ण अवसर बन रहा है। इससे न केवल युवा चिकित्सकों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है,बल्कि मानव स्वास्थ्य,सामाजिक कल्याण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर भी सार्थक विमर्श को प्रोत्साहन मिलेगा।

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