जन्मदिवस पर रोपा मोरपंखी का समलौण पौधा-अर्श नेगी की खुशियों को प्रकृति के नाम कर रछुली गांव ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। प्रकृति के प्रति प्रेम,पर्यावरण संरक्षण की भावना और पारंपरिक संस्कारों को जीवंत बनाए रखने का संदेश देते हुए जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड पौड़ी की पट्टी पैडुलस्यूं

📘 इन्हें भी पढ़ें

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। प्रकृति के प्रति प्रेम,पर्यावरण संरक्षण की भावना और पारंपरिक संस्कारों को जीवंत बनाए रखने का संदेश देते हुए जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड पौड़ी की पट्टी पैडुलस्यूं स्थित ग्राम रछुली में अर्श नेगी का जन्मदिवस अनूठे अंदाज में मनाया गया। दीपेंद्र सिंह एवं रचना देवी के पुत्र अर्श नेगी के जन्मदिवस के अवसर पर घर के आंगन में मोरपंखी का समलौण पौधा रोपित किया गया। इस पहल के माध्यम से जन्मदिन की खुशी को प्रकृति के संरक्षण से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का प्रेरक संदेश दिया गया।
आज के दौर में जहां जन्मदिवस मनाने के लिए अनेक प्रकार के आयोजन किए जाते हैं,वहीं रछुली गांव में पौधारोपण के माध्यम से इस अवसर को प्रकृति के नाम समर्पित करना एक सराहनीय पहल रही। मोरपंखी का पौधा रोपकर परिवार ने यह संदेश दिया कि जीवन के प्रत्येक खुशी भरे अवसर को पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत की जा सकती है। यह पौधा आने वाले समय में अर्श के जन्मदिवस की याद दिलाने के साथ ही परिवार के प्रकृति प्रेम और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक भी बनेगा।
मां रचना देवी ने ली पौधे के संरक्षण की जिम्मेदारी
समलौण पौधारोपण की इस पहल को सार्थक बनाने के लिए केवल पौधा रोपने तक ही सीमित नहीं रखा गया,बल्कि उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की गई। अर्श की मां रचना देवी ने रोपित मोरपंखी के पौधे की देखभाल और सुरक्षा का जिम्मा अपने हाथों में लिया। पौधे की नियमित देखभाल कर उसे सुरक्षित रखने का संकल्प इस आयोजन का महत्वपूर्ण पक्ष रहा। समलौण परंपरा की मूल भावना भी यही है कि पौधारोपण के साथ उसके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाई जाए,ताकि रोपित पौधा जीवित रहकर प्रकृति को समृद्ध करने में योगदान दे सके। इस प्रकार जन्मदिवस पर किया गया यह छोटा-सा प्रयास पर्यावरण के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी का उदाहरण बना।
समलौण परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान
कार्यक्रम का संचालन गांव की सेना नायिका हेमलता जोशी ने किया। उन्होंने समलौण पौधारोपण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन के प्रत्येक संस्कार एवं मांगलिक अवसर पर गांव-गांव जाकर लोगों को पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना हमारा कर्तव्य है। समलौण केवल पौधा रोपने की गतिविधि नहीं,बल्कि भावनाओं से जुड़ा ऐसा आंदोलन है,जो प्रकृति के प्रति प्रेम जगाने के साथ हमारी रीति-रिवाजों और परंपराओं को भी सहेजने का कार्य करता है।
उन्होंने कहा कि जन्मदिवस, विवाह सहित अन्य मांगलिक अवसरों पर पौधारोपण को परंपरा का हिस्सा बनाया जाए,ताकि प्रत्येक खुशी के अवसर पर प्रकृति को कुछ लौटाने की भावना विकसित हो। जब परिवार और समाज पौधों को अपने संस्कारों से जोड़ेंगे,तो पर्यावरण संरक्षण का संदेश नई पीढ़ी तक सहज रूप से पहुंचेगा। जोशी ने क्षेत्रवासियों से वनों को आग से बचाने,वन संपदा का संरक्षण करने तथा अधिक से अधिक पौधे रोपकर उनकी नियमित देखभाल करने की अपील भी की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि प्राकृतिक संपदा सुरक्षित रहेगी,तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण और समृद्ध प्राकृतिक विरासत मिल सकेगी।
सामूहिक सहभागिता से मजबूत होगा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
कार्यक्रम में समलौण सेना की सदस्य मोनिका देवी,जमुना देवी,चांदनी देवी,दमयंती देवी,लीला देवी सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने पौधारोपण की इस पहल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता का संदेश दिया।
रछुली गांव में जन्मदिवस पर किया गया यह समलौण पौधारोपण इस बात का उदाहरण है कि प्रकृति की रक्षा के लिए बड़े आयोजनों की नहीं,बल्कि छोटे-छोटे प्रयासों और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है। यदि प्रत्येक परिवार अपने विशेष अवसरों पर एक पौधा रोपने और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने का संकल्प ले,तो गांवों से शुरू हुई यह पहल व्यापक पर्यावरणीय बदलाव का आधार बन सकती है। अर्श नेगी के जन्मदिवस पर रोपा गया मोरपंखी का पौधा इस संदेश का प्रतीक बना कि जन्मदिवस का वास्तविक उत्सव केवल खुशियां मनाना नहीं,बल्कि प्रकृति के नाम एक सकारात्मक विरासत छोड़ना भी है। समलौण की यह परंपरा पर्यावरण संरक्षण,सामाजिक सहभागिता और लोकसंस्कृति के संरक्षण को एक सूत्र में पिरोते हुए समाज को प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराती है।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...