बूंखाल मेले को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने की तैयारी तेज-कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने परखी व्यवस्थाएं,श्रद्धालुओं की सुविधा-सुरक्षा के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की देवभूमि सांस्कृतिक,धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं की समृद्ध विरासत को अपने भीतर समेटे हुए है। इसी विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक जनपद पौड़ी गढ़वाल का प्रसिद्ध

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की देवभूमि सांस्कृतिक,धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं की समृद्ध विरासत को अपने भीतर समेटे हुए है। इसी विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक जनपद पौड़ी गढ़वाल का प्रसिद्ध बूंखाल मेला है,जहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां भगवती के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं। धार्मिक आस्था,लोक संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं से जुड़े इस ऐतिहासिक मेले को भव्य,सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में विकास भवन सभागार में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया,मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों,जनप्रतिनिधियों और मेला समिति के पदाधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में मेले की व्यवस्थाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा करते हुए कैबिनेट मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा,सुरक्षा और सुगम आवागमन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी तैयारियां निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाएं। कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि मेले से पहले चेकपोस्ट और बैरियर निर्माण का कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। पैठाणी से चौरीखाल तक सड़क मार्ग पर आवश्यक पैचवर्क कराया जाए,जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार से मंदिर तक जाने वाले मार्ग को चौड़ा करने तथा मार्ग में पड़ने वाले तीव्र मोड़ों को दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही को देखते हुए सड़क व्यवस्था का सुदृढ़ होना अत्यंत आवश्यक है। किसी भी स्थिति में यातायात बाधित न हो,इसके लिए संबंधित विभाग पहले से आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करें। मेले में उमड़ने वाली संभावित भीड़ को देखते हुए पार्किंग व्यवस्था को बैठक का प्रमुख विषय बनाया गया। कैबिनेट मंत्री ने अधिकारियों को मेला स्थल के आसपास उपलब्ध भूमि और अन्य उपयुक्त स्थानों का सर्वेक्षण कर पर्याप्त अस्थायी पार्किंग विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों को व्यवस्थित ढंग से पार्क कराया जाए,ताकि मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति उत्पन्न न हो और पैदल आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही पुलिस विभाग को प्रभावी यातायात प्रबंधन,भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मेले के दौरान पुलिस कंट्रोल रूम स्थापित करने तथा महत्वपूर्ण स्थानों पर लाउडस्पीकर की व्यवस्था करने को भी कहा गया,जिससे आवश्यक सूचनाएं समय पर श्रद्धालुओं तक पहुंचाई जा सकें। श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को मेला स्थल पर मेडिकल कैंप स्थापित करने तथा आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए एंबुलेंस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा गया,ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके। उन्होंने अग्निशमन व्यवस्था को भी चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए,जिससे किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। कैबिनेट मंत्री ने जिला पंचायत को मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में व्यापक सफाई अभियान चलाने,झाड़ियों का कटान कराने,पर्याप्त शौचालय और कूड़ेदान स्थापित करने के निर्देश दिए। बैठक में यह भी तय किया गया कि शौचालयों का निर्माण कर उनके नियमित संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद उन्हें मंदिर समिति को सौंपा जाएगा। इसके अतिरिक्त पेयजल और विद्युत आपूर्ति निर्बाध बनाए रखने,मंदिर परिसर एवं आवश्यक स्थानों पर हाईमास्ट लाइट लगाने तथा पहले से स्थापित प्रकाश व्यवस्थाओं की मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए। सर्द मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था करने तथा बायो टॉयलेट उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया। बैठक में पैठाणी स्थित प्रसिद्ध राहु मंदिर में चल रहे निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई। मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से सिंचाई विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक निर्माण कार्य कराने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि धार्मिक स्थलों पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विकास कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने कहा कि बूंखाल मेले की तैयारियों को लेकर विभिन्न विभागों और हितधारकों के साथ सकारात्मक चर्चा हुई है। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समय पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि तैयारियों की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के लिए अधिकारियों की एक टीम मेला स्थल का निरीक्षण करेगी। जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर अलग से बैठक आयोजित की जाएगी,जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों,ग्रामीणों,व्यापारियों और मेला समिति के सुझावों को भी शामिल किया जाएगा,ताकि व्यवस्थाओं को जमीनी आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर बनाया जा सके। लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण आयोजन है बूंखाल मेला
मेला समिति के सचिव कमल रावत ने कहा कि बूंखाल मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं,बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। इस आयोजन से क्षेत्र की परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ सामाजिक सहभागिता और स्थानीय गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने मेले की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन की ओर से की जा रही तैयारियों को महत्वपूर्ण बताया। बैठक में संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात,मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.मेघना असवाल,सीओ अस्मिता ममगांई,अधिशासी अभियंता जल संस्थान टी.एस.रावत,लोक निर्माण विभाग के शिवम मित्तल,पीएमजीएसवाई के परशुराम चमोली,एआरटीओ मंगल सिंह,अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत संजय खंडूरी,परियोजना अधिकारी उरेडा चंद्रप्रकाश उपाध्याय,एसडीओ वन आयशा बिष्ट,प्रभारी थाना निरीक्षक कुलदीप रमोला,भाजपा जिलाध्यक्ष कमल किशोर रावत,मेला समिति के सचिव कमल रावत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी,मेला समिति के प्रतिनिधि और व्यापार मंडल के सदस्य उपस्थित रहे। बूंखाल मेले की धार्मिक गरिमा और लोक परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की तैयारियों का प्रमुख उद्देश्य है। अब सभी की निगाहें मेला स्थल पर होने वाले निरीक्षण और व्यवस्थाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।

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