
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाओं को विस्तार देने और युवाओं को कृषि आधारित उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रहा है। विश्वविद्यालय के ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से मशरूम उत्पादन,स्पॉन निर्माण,मूल्य संवर्धन एवं कृषि उद्यमिता पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 4 नवंबर बुधवार को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार हेतु तैयार किए गए पोस्टर का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए इनके माध्यम से युवाओं,विद्यार्थियों और स्थानीय समुदाय को स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ने की महत्ता को रेखांकित किया। मशरूम उत्पादन जैसी कम भूमि और सीमित संसाधनों में अपनाई जा सकने वाली कृषि गतिविधियां पर्वतीय क्षेत्रों की आजीविका को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का विषय मशरूम तकनीक-सतत आजीविका सृजन हेतु मशरूम उत्पादन,स्पॉन निर्माण,मूल्य संवर्धन एवं कृषि उद्यमिता रखा गया है। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को केवल मशरूम उत्पादन की जानकारी ही नहीं दी जाएगी,बल्कि उत्पादन से लेकर विपणन और इसे एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने तक की व्यावहारिक समझ भी प्रदान की जाएगी। कार्यक्रम में ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं कृषि एवं संबद्ध विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो.राजेंद्र सिंह नेगी, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो.ओमप्रकाश गुसाईं,अधिष्ठाता (भर्ती एवं पदोन्नति) प्रो.मोहन सिंह पंवार,बिड़ला परिसर के निदेशक प्रो.हरभजन सिंह चौहान,मुख्य नियंता प्रो.दीपक कुमार तथा टिहरी परिसर बादशाहीथौल के निदेशक प्रो.ए.ए.बौराई एवं डीएसीई के समन्वयक प्रो.एम.एम.सेमवाल उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम के सह-संरक्षक डॉ.संतोष सिंह,आयोजन सचिव डॉ.अंकित सती,मॉडरेटर डॉ.आर.सी.नौटियाल एवं डॉ.ऋषिका नेगी तथा ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग के शोधार्थी प्रणव सिंह सहित अन्य सदस्य भी विमोचन समारोह में मौजूद रहे। विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित यह पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 से 20 नवंबर 2026 तक संचालित किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विशेष रूप से ऑयस्टर मशरूम की वैज्ञानिक उत्पादन तकनीक,मशरूम के बीज अर्थात स्पॉन तैयार करने की विधि,उत्पादन की आवश्यक परिस्थितियों,मशरूम के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन तथा कृषि उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया जाएगा। प्रशिक्षण में सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक अनुभव पर भी विशेष जोर रहेगा,जिससे प्रतिभागी प्रशिक्षण के बाद स्वयं इस कार्य को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकें। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन,सीमित कृषि भूमि,घटती खेती और रोजगार के अभाव जैसी चुनौतियां लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं। ऐसे में मशरूम उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला एक संभावनाशील विकल्प बन सकता है। कम जगह में वैज्ञानिक तरीके से इसका उत्पादन कर स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। साथ ही मशरूम के प्रसंस्करण,पैकेजिंग और विपणन के माध्यम से इसे छोटे कृषि उद्यम के रूप में भी स्थापित किया जा सकता है। गढ़वाल विश्वविद्यालय की यह पहल युवाओं,किसानों,ग्रामीण महिलाओं और स्वरोजगार की तलाश कर रहे लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य प्रशिक्षण एवं तकनीकी ज्ञान को समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका के स्थायी विकल्पों को प्रोत्साहित करना है। निश्चित रूप से इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि को परंपरागत आजीविका तक सीमित रखने के बजाय उसे आधुनिक तकनीक,नवाचार और उद्यमिता से जोड़ने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। यदि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागी इस तकनीक को अपने गांवों तक पहुंचाते हैं तो मशरूम उत्पादन पहाड़ में स्वरोजगार,स्थानीय उत्पादन और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का एक सशक्त माध्यम बन सकता है।