कीर्तिनगर में आवारा गोवंश बना समस्या,अरण्यक जन सेवा संस्था ने गौशाला निर्माण व कार्यवाही की उठाई मांग

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी कीर्तिनगर/टिहरी गढ़वाल। तहसील कीर्तिनगर क्षेत्र में आवारा और निराश्रित गोवंश की बढ़ती समस्या अब जनहित का गंभीर मुद्दा बन गई है। आए दिन राष्ट्रीय राजमार्ग,संपर्क मार्गों,बस्तियों और मोहल्लों में

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

कीर्तिनगर/टिहरी गढ़वाल। तहसील कीर्तिनगर क्षेत्र में आवारा और निराश्रित गोवंश की बढ़ती समस्या अब जनहित का गंभीर मुद्दा बन गई है। आए दिन राष्ट्रीय राजमार्ग,संपर्क मार्गों,बस्तियों और मोहल्लों में लोग दूध दुहने और हल चलाने के बाद अपने पालतू पशुओं को सड़कों व खेतों में खुले में छोड़ देते हैं। इन आवारा गोवंश के कारण न सिर्फ सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं बल्कि लोगों की जान-माल की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। इसी समस्या को देखते हुए जन अरण्यक जन सेवा संस्था के सचिव इंद्र दत्त रतूड़ी एवं संस्था के उपाध्यक्ष दीपक सिंह ने उप जिलाधिकारी कीर्तिनगर एवं तहसीलदार कीर्तिनगर को अलग-अलग प्रेषित ज्ञापनों के माध्यम से अवगत कराया। संस्था ने पत्रों में कहा है कि निराश्रित व आवारा गोवंश सड़कों पर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। नगर और ग्रामीण क्षेत्र के लोग दूध व हल जोतने के बाद गाय-बैलों को सड़कों और खेतों में छोड़ देते हैं। लगातार हादसे हो रहे हैं और नगर-क्षेत्र का यातायात भी बाधित होता है। संस्था ने तत्काल एक स्थायी गौशाला निर्माण की मांग की है ताकि इन गोवंश को सुरक्षित रखा जा सके और उनका पालन-पोषण भी संभव हो। संस्था ने यह भी कहा कि कीर्तिनगर नगर निकाय द्वारा पहले से ही लगभग 62 निराश्रित गौवंश की देखभाल की जा रही है,किंतु लगातार बढ़ती संख्या के चलते अतिरिक्त गौशाला का निर्माण आवश्यक है। इसके साथ ही संस्था ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में अपने पालतू पशुओं को आवारा छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए। पशुपालकों को चेतावनी देकर यह सुनिश्चित किया जाए कि वे दूध दुहने के बाद अपने गौवंश को सड़कों पर न छोड़ें। नगर पंचायत,विकासखंड,तहसील प्रशासन और पशु चिकित्सक विभाग मिलकर ठोस कदम उठाएं। संस्था ने स्पष्ट कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आवारा गोवंश की समस्या विकराल रूप ले लेगी। साथ ही आम जनता को होने वाली दुर्घटनाओं,यातायात अव्यवस्था और किसानों की फसलों के नुकसान का जिम्मेदार भी प्रशासन को ठहराना पड़ेगा।

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