पहाड़ों की आंतें खोखली रेल सुरंगों से हिलती धरती-टीचर्स कॉलोनी में कई परिवारों ने छोड़े घर

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पहाड़ों पर रेल परियोजना के नाम पर हो रही अंधाधुंध सुरंग निर्माण और माइनिंग ब्लास्टिंग ने स्थानीय लोगों की जिंदगी उथल-पुथल कर दी है। श्रीकोट

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पहाड़ों पर रेल परियोजना के नाम पर हो रही अंधाधुंध सुरंग निर्माण और माइनिंग ब्लास्टिंग ने स्थानीय लोगों की जिंदगी उथल-पुथल कर दी है। श्रीकोट से घसियामहादेव के बीच टीचर्स कॉलोनी क्षेत्र में भू-धंसाव का संकट लगातार गहराता जा रहा है। दरारों से चीखते पहाड़ और हिलती नींवों के बीच अब हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कई परिवार अपने घरों को खाली करने को मजबूर हो गए हैं। वरिष्ठ जियोलॉजिस्ट का कहना है रेलवे सुरंगों के निर्माण में हो रही माइनिंग ब्लास्टिंग ने चट्टानों की संरचना कमजोर कर दी है। बरसात का पानी दरारों में रिसकर भू-धंसाव को और बढ़ा देता है। पहाड़ों की आंतरिक संरचना को नुकसान पहुंचाना प्रकृति के साथ खतरनाक खिलवाड़ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति को समझे बिना अंधाधुंध खुदाई जारी रही,तो आने वाले वर्षों में गढ़वाल मंडल के कई इलाके गंभीर भू-धंसाव और भूस्खलन की चपेट में आ सकते हैं। भू-धंसाव से प्रभावित निवासी वासुदेव कंडारी ने कहा अगर रेलवे हमें उचित मुआवजा नहीं देती या विस्थापन की व्यवस्था नहीं करती,तो हम भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर हो जाएंगे। जरूरत पड़ी तो रेलवे का निर्माण कार्य रोकने के लिए उग्र आंदोलन भी करेंगे। प्रभावित परिवारों में सरोजनी देवी,सुधा देवी,विकास सिंह,राकेश नैथाणी,शकुंतला देवी,नीरज नैथाणी,अरुण रावत,प्रकाश मैखुरी,राजेश असवाल,सुरेंद्र पंवार,मनीष पोखरियाल आदि शामिल हैं। इनमें से कुछ परिवारों ने भू-धंसाव के बढ़ते खतरे को देखते हुए अपने घर खाली कर दिए हैं और अस्थायी रूप से रिश्तेदारों या किराए के मकानों में शरण ली है। रेलवे प्रशासन की सफाई-रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के महाप्रबंधक पामीर अरोड़ा एवं अपर महाप्रबंधक एवं भू-वैज्ञानिक विजय डंगवाल ने कहा अगर रेलवे के निर्माण कार्य से भू-स्खलन हुआ है,तो प्रभावित परिवारों को हर हाल में मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि,इस पर अंतिम निर्णय जिलाधिकारी की रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा। प्रकृति की कीमत पर विकास का मॉडल-रेल परियोजना से जुड़े सुरंग निर्माण कार्यों पर सवाल उठने लगे हैं। जहां सरकार कनेक्टिविटी और विकास की गाथा गा रही है,वहीं आम जनता अपनी छत,जमीन और जीवन को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है-पहाड़ों की भूगर्भीय संरचना का गहन अध्ययन किए बिना हो रही खुदाई आत्मघाती साबित हो सकती है। विकास की इस दौड़ में अगर पहाड़ों की नाजुक संरचना की अनदेखी हुई,तो आने वाले समय में उत्तराखंड के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर आपदाएं देखने को मिलेंगी। प्रभावित परिवारों की मुख्य मांगें-तत्काल विस्थापन और उचित मुआवजा,जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर शीघ्र कार्रवाई,भारी बारिश के दौरान सुरंग निर्माण कार्य पर अस्थायी रोक।

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