
हिमालय टाइम्स
गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। जीवन की कठिन परिस्थितियों के बीच भी जब लोग उम्मीद और पर्यावरण संरक्षण की राह चुनते हैं,तो वह पल समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकास खण्ड पाबो के पट्टी बालीकण्डारस्यूं के ग्राम सेंजी में ऐसा ही दृश्य उस समय देखने को मिला जब ग्राम निवासी पवन भण्डारी एवं बबली भण्डारी के पुत्र प्रिंस भण्डारी का जन्मदिन एक अनोखे अंदाज़ में मनाया गया। राजकीय चिकित्सालय सेंजी परिसर में गेंदा का समलौंण पुष्प रोपित कर न केवल जन्मदिन को यादगार बनाया गया,बल्कि इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का संदेश भी दिया गया। पुष्प की देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी स्वयं प्रिंस की मां बबली भण्डारी ने अपने ऊपर ली। गौरतलब है कि 6 अगस्त को आई भीषण आपदा में ग्राम सेंजी के 15 परिवार बेघर हो गए थे,जो वर्तमान में अस्पताल परिसर में ही जीवन यापन कर रहे हैं। ऐसे हालातों में जन्मदिन समारोह भी अस्पताल में ही आयोजित हुआ,जिसमें सभी आपदा पीड़ित परिवार शामिल रहे। यह नजारा मानो दुखों के बीच उम्मीद और सामूहिकता का प्रतीक बन गया। गढ़वाल में समलौंण पुष्प का विशेष महत्व है। किसी शुभ अवसर पर्व या पारिवारिक मांगलिक कार्य में समलौंण का रोपण करना मंगलकामना,शांति और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है,जो न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है बल्कि पर्यावरण संरक्षण की भावना को भी पुष्ट करती है। इसी परंपरा के तहत प्रिंस भण्डारी के जन्मदिन पर गेंदा का पौधा रोपित कर समाज को यह संदेश दिया गया कि खुशियों के अवसर पर वृक्ष और पुष्प लगाने से प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों को भी सुख मिलता है। कार्यक्रम का संचालन समलौंण सेना नायिका ग्रुप-2 की गीता देवी ने किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी हम सबको मिलकर हौसला बनाए रखना होगा। यही सामूहिक शक्ति हमें आगे बढ़ने की ताकत देती है। महिला मंगल दल की अध्यक्ष और सामाजिक कार्यों में सदैव सक्रिय रहने वाली बबली भण्डारी ने सभी को साथ लेकर अस्पताल परिसर की सफाई अभियान चलाया। उन्होंने कहा फिलहाल यह अस्पताल ही हमारा घर है,और इसे अपने घर की तरह साफ-सुथरा रखना हमारी जिम्मेदारी है। इस अवसर पर समलौंण सेना की सदस्य व आपदा पीड़ित कबूतरी देवी,बसंती देवी,विशम्बरी देवी,हेमा देवी,शांति देवी,सुलोचना देवी,बिमला देवी सहित अन्य ग्रामीण महिलाएं भी उपस्थित रहीं। सभी ने मिलकर कार्यक्रम को सामूहिक सहयोग और संवेदनशीलता का उदाहरण बनाया। यह जन्मदिन समारोह न केवल एक बच्चे की खुशियों का अवसर था,बल्कि आपदा से जूझ रहे परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण भी। साथ ही,यह आयोजन इस बात का संदेश भी देता है कि हर परिस्थिति में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता की भावना को जीवित रखना ही असली मानवता है।