
हिमालय टाइम्स
गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी के विकास खण्ड थलीसैण के प्रसिद्ध राहू मंदिर इन्द्रेश्वर महादेव में शनिदेव की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन धार्मिक उल्लास और श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ। इस पावन अवसर पर मंदिर प्रांगण में शमी (समलौण) का पौधा रोपकर उपस्थित श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण एवं सर्वजन कल्याण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का संचालन समलौण मित्र पंडित गीताराम पंत ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हम जीवित तभी रह पाएंगे जब वृक्ष रहेंगे। बिना वृक्ष जीवन की कल्पना असंभव है। पौधरोपण न केवल हमारे जीवन के लिए आवश्यक है,बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को भी सुरक्षित भविष्य प्रदान करता है। इसी कड़ी में समलौण पर्यावरण संरक्षण अभियान के संस्थापक वीरेंद्र दत्त गोदियाल ने भी संदेश देते हुए कहा कि शमी (समलौण) केवल एक पेड़ नहीं,बल्कि जीवन का प्रतीक है। इसका रोपण हमें न केवल धार्मिक पुण्य दिलाता है बल्कि यह धरती को हरा-भरा और सुरक्षित भी बनाता है। अगर हर व्यक्ति एक समलौण पौधा रोपे,तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वायु,जल और हरियाली का उपहार मिलेगा। मंदिर प्रांगण में हुए इस धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन का मुख्य नेतृत्व रणबीर सिंह चौहान,बीरेंद्र सिंह कडारी,दिनेश पंवार,राम सिंह आदि ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों ने भागीदारी कर धार्मिक अनुष्ठानों में आस्था प्रकट की और शमी के पौधे की परिक्रमा कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि हम सभी न केवल स्वयं पौधारोपण करेंगे,बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। हर वर्ष कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करना हमारा धर्म और कर्तव्य होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समलौण (शमी) को देववृक्ष माना गया है। यह वृक्ष न केवल शनिदेव को प्रिय है बल्कि इसे सुख-समृद्धि और शांति का प्रतीक भी माना जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी शमी का पेड़ वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाता है तथा मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखने में सहायक होता है। इस प्रकार यह वृक्ष आस्था और विज्ञान दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है।