
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर राजकीय बालिका इंटर कॉलेज श्रीनगर में रविवार को एक विशेष विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौड़ी गढ़वाल के निर्देशानुसार आयोजित हुआ,जिसकी अध्यक्षता सिविल जज जूनियर डिवीजन एवं अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति कु.अलका ने की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज की नींव हैं,वे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माता हैं। शिक्षकों को केवल ज्ञान का ही नहीं बल्कि विधिक अधिकारों एवं कर्तव्यों की जानकारी भी होनी चाहिए,ताकि वे समाज को सही दिशा में मार्गदर्शन दे सकें। शिविर में बार एसोसिएशन श्रीनगर के अध्यक्ष प्रमेश चन्द्र जोशी,संरक्षक अनूप पांथरी,सचिव बह्मनंद भट्ट समेत अनेक अधिवक्ता एवं पीएलवी सदस्य उपस्थित रहे। विद्यालय परिवार ने अतिथियों का स्वागत कर कार्यक्रम को भव्य बनाया। शिविर के दौरान सिविल जज कु.अलका द्वारा नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिष्ठित शिक्षकों को सम्मानित किया गया। सम्मानित शिक्षकों में सुमनलता पंवार राजकीय बालिका इंटर कॉलेज श्रीनगर,मुकेश काला राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय श्रीकोट,मुकेश बहुगुणा राजकीय प्राथमिक विद्यालय,जोगड़ी,शालिनी गुरुकुल विद्यालय भक्तियाना श्रीनगर,मुकेश मैठाणी शिशु मंदिर श्रीनगर,मंजूलता बिष्ट जूनियर हाई स्कूल डांग,रेखा नेगी प्राथमिक विद्यालय डांग,कृति सेंट्रल स्कूल श्रीनगर,भीमराज बिष्ट सरस्वती विद्या मंदिर श्रीकोट,किरण बहुगुणा नंदन नगर पालिका श्रीनगर शामिल रहे। शिविर में उपस्थित शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं को मौलिक अधिकारों,महिला एवं बाल संरक्षण कानून,घरेलू हिंसा अधिनियम,निःशुल्क विधिक सहायता, साक्षरता और समाज में न्याय तक समान पहुंच जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। पीएलवी सदस्य पूनम हटवाल,रोशनी देवी,प्रकाश नेगी,मानव बिष्ट एवं प्रियंका रॉय ने भी सहयोग किया। यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था,बल्कि इसमें समाज के गहरे मुद्दों को भी छुआ गया। आज भी ग्रामीण अंचलों में महिलाएं और बच्चे अपने अधिकारों से पूरी तरह अवगत नहीं हैं। कई बार वे अन्याय सहते हैं लेकिन कानूनी जानकारी के अभाव में आवाज़ नहीं उठा पाते। ऐसे में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। शिक्षक यदि बच्चों और समुदाय को न्याय,समानता और अधिकारों की सही समझ देंगे,तो यह न केवल शिक्षा बल्कि सशक्तिकरण की दिशा में भी एक बड़ी पहल होगी। यह शिविर इस बात का सशक्त उदाहरण रहा कि शिक्षा और विधिक जागरूकता मिलकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। कार्यक्रम का समापन करते हुए सिविल जज कु.अलका ने कहा कि शिक्षक यदि विधिक साक्षरता के वाहक बन जाएं,तो समाज में न्याय के प्रति जागरूकता स्वतः बढ़ेगी और ग्रामीण से लेकर शहरी स्तर तक एक सशक्त और जागरूक नागरिक समाज का निर्माण संभव होगा। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में एक प्रेरणादायी माहौल रहा। शिक्षक दिवस पर आयोजित यह विधिक जागरूकता शिविर सभी के लिए यादगार साबित हुआ और उपस्थित जनों के मन में यह विश्वास जगाया कि न्याय की रोशनी तभी घर-घर पहुंचेगी जब समाज का हर व्यक्ति जागरूक होगा।