
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। रेलवे परियोजना से प्रभावित मलेथा क्षेत्र में टिहरी जिला विकास प्राधिकरण द्वारा लागू किए गए फ्रीज जोन के आदेश (जीओ) को निरस्त करने की मांग को लेकर सोमवार को ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। देवप्रयाग जन अधिकार मोर्चा के संस्थापक गणेश भट्ट के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण एसडीएम कार्यालय,कीर्तिनगर पहुंचे और प्राधिकरण के खिलाफ नारेबाजी कर अपना आक्रोश प्रकट किया। ग्रामीणों ने कहा कि जब रेलवे परियोजना शुरू हुई थी तब किसी भी मंच पर उन्हें प्राधिकरण कानून और धारा-7 के लागू होने की जानकारी नहीं दी गई। आज जब वे अपने मकान-दुकान का निर्माण कर रहे हैं तो अचानक प्राधिकरण की ओर से नोटिस जारी कर कार्य रुकवाए जा रहे हैं। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे गणेश भट्ट ने स्पष्ट कहा कि सुरंगों में हुए विस्फोटों से ग्रामीणों के मकानों में दरारें आईं,परंतु अभी तक उचित मुआवजा नहीं दिया गया। वहीं,दूसरी ओर रेलवे स्टेशन से 400 मीटर की परिधि में निर्माण कार्य पर रोक लगाकर ग्रामीणों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक विनोद कंडारी को वर्ष 2024 में ही इस प्राधिकरण के लागू होने की जानकारी थी,लेकिन उन्होंने ग्रामीणों को न तो अवगत कराया और न ही इस काले कानून का विरोध किया। भट्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो भविष्य में रेलवे स्टेशन के आसपास की जमीन बड़े उद्योगपतियों के हाथों सौंपने की तैयारी है। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि नोटिस वापस नहीं लिए गए और मलेथा को फ्रीज जोन घोषित करने वाले जीओ को तत्काल निरस्त नहीं किया गया,तो क्षेत्रीय विधायक समेत राज्य सरकार के खिलाफ तेजतर्रार जन आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस मौके पर मौजूद उप जिलाधिकारी कीर्तिनगर ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि भवनों को हुए नुकसान के संदर्भ में दोबारा सर्वे कराकर प्रतिकार भुगतान पर विचार चल रहा है और शीघ्र ही इसकी जानकारी ग्रामीणों को दी जाएगी। ग्रामीणों की व्यथा और उपस्थिति-आक्रोश व्यक्त करने वालों में विजय रावत,रविन्द्र बिष्ट,अचल नेगी,जयवीर राणा,अनिल भट्ट,समाजसेवी बीना नेगी,कल्पना बलूनी,रज्जन नेगी,नरेंद्र गुसाईं,दिनेश भट्ट,राहुल नेगी,गिरीश चन्द्र,हरीश चन्द्र,जयपाल पंवार,पवन पुरी, कीर्ति सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। ग्रामीणों की पीड़ा साफ झलक रही थी,ना मुआवजा मिला,ना हक और अब घर-बार बनाने पर भी रोक लगा दी गई। आखिर जाएं तो जाएं कहां,मलेथा की आवाज दबेगी नहीं,अधिकार की लड़ाई रुकेगी नहीं,मुआवजा दो-फ्रीज जोन वापस लो,गांव के हक पर डाका नहीं चलेगा।