डॉ.अतुल बमराड़ा व प्रो.अनिल नौटियाल का शोध भविष्य की दिशा तय करता हुआ

हिमालय टाइम्सगबर सिंह भंडारी श्रीनगर गढ़वाल। आज जब दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता,डिजिटल कक्षाओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के युग में प्रवेश कर चुकी है,तब शिक्षा 5.0 केवल तकनीक पर आधारित न होकर समाज की भागीदारी और

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गबर सिंह भंडारी

श्रीनगर गढ़वाल। आज जब दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता,डिजिटल कक्षाओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के युग में प्रवेश कर चुकी है,तब शिक्षा 5.0 केवल तकनीक पर आधारित न होकर समाज की भागीदारी और मानवीय मूल्यों के पुनर्जागरण की ओर संकेत करती है। इसी संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका अनुसंधान अन्वेषिका में प्रकाशित एक ताज़ा शोधपत्र ने शिक्षा-जगत में नई बहस को जन्म दिया है। यह शोध-पत्र शिक्षा 5.0 के युग में समाज की भूमिका पौड़ी गढ़वाल का एक अध्ययन डॉ.अतुल बमराड़ा शिक्षा विभाग उत्तराखंड शासन और प्रो.अनिल नौटियाल एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय द्वारा लिखा गया है। अध्ययन में रेखांकित किया गया है कि शिक्षा का भविष्य केवल कक्षाओं और किताबों से तय नहीं होगा,बल्कि परिवार,विद्यालय और समुदाय की सामूहिक सहभागिता ही छात्रों के सर्वांगीण विकास की कुंजी बनेगी। जिन विद्यालयों में अभिभावक और समुदाय सक्रिय रूप से जुड़े,वहां छात्रों की उपलब्धि बेहतर,नामांकन दर ऊंची और मूल्यबोध गहरा पाया गया। शिक्षक,अभिभावक और विद्यार्थी के बीच निरंतर संवाद ने न केवल शैक्षिक प्रदर्शन सुधारा,बल्कि जीवन-कौशल,सकारात्मक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी मजबूत किया। यह भी स्पष्ट हुआ कि समाज की सहभागिता शिक्षा में केवल सहयोगी नहीं बल्कि प्रेरक तत्व की भूमिका निभाती है। डॉ.बमराड़ा और प्रो.नौटियाल का कहना है देश में सभी बच्चों की आधारभूत शिक्षा को नई ऊंचाई देने का सपना तभी साकार होगा,जब विद्यालय,शिक्षक,अभिभावक और समाज एक साझा मंच पर खड़े होकर मिलकर कार्य करेंगे। शिक्षा 5.0 का मूल मंत्र यही है समाज और विद्यालय का सेतु। इस शोध में पौड़ी गढ़वाल जिले के कई विद्यालयों का केस स्टडी आधार रहा। नतीजे बताते हैं कि जहां विद्यालयों ने सामुदायिक संवाद योजना,अभिभावक सहभागिता और स्थानीय अनुभवों को पाठ्यचर्या का हिस्सा बनाया,वहां छात्रों में न केवल ज्ञानात्मक बल्कि भावनात्मक और नैतिक विकास भी अधिक हुआ। शोध में सिफारिश की गई है कि विद्यालय स्तर पर अभिभावक-समुदाय संवाद मंच को संस्थागत रूप दिया जाए। स्थानीय व्यावहारिक अनुभवों को शिक्षा प्रणाली में जोड़ा जाए। विद्यार्थियों में केवल सूचना का संचार नहीं बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास सुनिश्चित किया जाए। शोध यह भी इंगित करता है कि शिक्षा 5.0 केवल तकनीकी नवाचारों-जैसे स्मार्ट क्लासरूम,वर्चुअल लर्निंग और एआई टूल्स तक सीमित नहीं रह सकती। यदि शिक्षा का उद्देश्य सक्षम और संवेदनशील नागरिक बनाना है तो समाज को विद्यालय का अभिन्न हिस्सा बनना ही होगा। यह शोध-पत्र जुलाई 2025 के अंक में प्रकाशित हुआ है और शिक्षा जगत को यह संदेश दे रहा है कि शिक्षा का भविष्य केवल डिजिटल नहीं,बल्कि सामाजिक भी है।

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